एक सवाल आज़ादी मांगने वाले विद्यार्थियों से
तुम्हे आज़ादी चाहिए तो किस से ? तुम तो खुद एक आज़ाद मुल्क में रहते हो, तो फिर आज़ादी किस्से?
तुम्हारी समझ से आज़ादी क्या है? आज़ादी की परिभाषा क्या है? बहुत साल पहले तुम्हारी ही तरह कुछ विद्यार्थियों ने भी आज़ादी मांगी थी। और उस आज़ादी को पाने के लिए हँसते हँसते फांसी पर झूल गए थे। भूल गए तुम भगत सिंह जी और उनके साथियों को ? उन्होंने आज़ादी मांगी थी विदेशियों से। तुम किस्से आज़ादी मांग रहे हो। अब तो ये देश आज़ाद है। पूरा हिंदुस्तान तुम्हारा है, तुम पुरे हिंदुस्तान के हो। फिर आज़ादी तुम किस्से मांगते हो? जिस यूनिवर्सिटी में तुम पढ़ते हो वो एक आज़ाद भारत की यूनिवर्सिटी है जहां तुम्हे ऊंची से ऊंची डिग्री लेने की तुम्हें आज़ादी है। और मत भूलो, तुम्हारी पढाई का खर्च भी इस आज़ाद देश के नागरिक उठाते है। क्या तुमने कभी सोचा है के तुम्हारी पढाई के खर्च में इस देश के सबसे गरीब आदमी का भी कॉन्ट्रिब्यूशन होता है। देश तुम पर इस लिए खर्च करता है के तुम पढ़ लिख कर इस देश को और बेहतर बनाओगे। एक ऐसा देश बनाओगे जहां सब मिलकर बढ़ेंगे। और तुम क्या कर रहे ? कभी सोचा है ? मैं नहीं जनता के तुम्ह कौन बरगला रहा है ? कुछ लोग कहते है के पाकिस्तान। तो क्या पाकिस्तान तुम्हारा आदर्श है?
वो पाकिस्तान जहां का आम नागरिक कठमुल्लाओं और फौज की दहशत में जीता है। वो पाकिस्तान जहां कोई लोकतान्त्रिक मूल्य नहीं है। वो पाकिस्तान जहां नागरिक अधिकारों पर जब चाहे तब फौज कब्ज़ा कर लेती है। वो पाकिस्तान जो अपने ही मासूम बच्चों पर गोली चलाता है। क्या तुम भूल गए के उन बच्चों की मौत पर हिंदुस्तान की माएं रोईं थीं।
हो सकता है तुम्हें सिस्टम से कोई शिकायत हो। तो सिस्टम बदलने से तुम्हे कौन रोकता है। काबिल बनो और बदल दो सिस्टम को।
हो सकता है तुम्हें किसी एक या सभी राजनितिक दलों से शिकायत हो। तो लो अपना एक नया राजनितिक दल। कौन रोकता है तुम्हें ? तुम्हें हर चीज़ की आज़ादी है। और ये आज़ादी तुम्हें हज़ारो क्रांतिकारियों की क़ुरबानी से मिली है। उनकी क़ुरबानी का मज़ाक मत बनाओ। तुम जो कर रहे हो, भले तुम उसे कोई क्रांति मान लो लेकिन सत्य तो ये है के वो एक चूतियापे से ज्यादा कुछ नहीं।
तुम्हे आज़ादी चाहिए तो किस से ? तुम तो खुद एक आज़ाद मुल्क में रहते हो, तो फिर आज़ादी किस्से?
तुम्हारी समझ से आज़ादी क्या है? आज़ादी की परिभाषा क्या है? बहुत साल पहले तुम्हारी ही तरह कुछ विद्यार्थियों ने भी आज़ादी मांगी थी। और उस आज़ादी को पाने के लिए हँसते हँसते फांसी पर झूल गए थे। भूल गए तुम भगत सिंह जी और उनके साथियों को ? उन्होंने आज़ादी मांगी थी विदेशियों से। तुम किस्से आज़ादी मांग रहे हो। अब तो ये देश आज़ाद है। पूरा हिंदुस्तान तुम्हारा है, तुम पुरे हिंदुस्तान के हो। फिर आज़ादी तुम किस्से मांगते हो? जिस यूनिवर्सिटी में तुम पढ़ते हो वो एक आज़ाद भारत की यूनिवर्सिटी है जहां तुम्हे ऊंची से ऊंची डिग्री लेने की तुम्हें आज़ादी है। और मत भूलो, तुम्हारी पढाई का खर्च भी इस आज़ाद देश के नागरिक उठाते है। क्या तुमने कभी सोचा है के तुम्हारी पढाई के खर्च में इस देश के सबसे गरीब आदमी का भी कॉन्ट्रिब्यूशन होता है। देश तुम पर इस लिए खर्च करता है के तुम पढ़ लिख कर इस देश को और बेहतर बनाओगे। एक ऐसा देश बनाओगे जहां सब मिलकर बढ़ेंगे। और तुम क्या कर रहे ? कभी सोचा है ? मैं नहीं जनता के तुम्ह कौन बरगला रहा है ? कुछ लोग कहते है के पाकिस्तान। तो क्या पाकिस्तान तुम्हारा आदर्श है?
वो पाकिस्तान जहां का आम नागरिक कठमुल्लाओं और फौज की दहशत में जीता है। वो पाकिस्तान जहां कोई लोकतान्त्रिक मूल्य नहीं है। वो पाकिस्तान जहां नागरिक अधिकारों पर जब चाहे तब फौज कब्ज़ा कर लेती है। वो पाकिस्तान जो अपने ही मासूम बच्चों पर गोली चलाता है। क्या तुम भूल गए के उन बच्चों की मौत पर हिंदुस्तान की माएं रोईं थीं।
हो सकता है तुम्हें सिस्टम से कोई शिकायत हो। तो सिस्टम बदलने से तुम्हे कौन रोकता है। काबिल बनो और बदल दो सिस्टम को।
हो सकता है तुम्हें किसी एक या सभी राजनितिक दलों से शिकायत हो। तो लो अपना एक नया राजनितिक दल। कौन रोकता है तुम्हें ? तुम्हें हर चीज़ की आज़ादी है। और ये आज़ादी तुम्हें हज़ारो क्रांतिकारियों की क़ुरबानी से मिली है। उनकी क़ुरबानी का मज़ाक मत बनाओ। तुम जो कर रहे हो, भले तुम उसे कोई क्रांति मान लो लेकिन सत्य तो ये है के वो एक चूतियापे से ज्यादा कुछ नहीं।
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