बस्सी साहब का कहना है के कन्हैया की ज़मानत का विरोध दिल्ली पुलिस नहीं करेगी। क्यों भाई क्यों नहीं करेगी ? क्या कन्हैया अकस्मात देश द्रोही से देश भक्त हो गया ? या दिल्ली पुलिस की देश द्रोह को लेकर परिभाषा बदल गयी ? या कन्हैया देश द्रोही था ही नहीं ? उस पर देश द्रोह का इल्जाम किसी एजेंडे के तहद लगाया गया और दिल्ली पुलिस के पास जानती है के उसके पास कन्हैया के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। ज़मानत का विरोध कर अपनी भद्द पिटवाने से बेहतर है के ज़मानत का विरोध ही न किया जाय।
अगर कन्हैया की गिरफ़्तारी किसी राजनितिक षड्यंत्र के तहद हुई थी तो यह इस देश के लिए बहुत के लिए एक बहुत ही घातक परम्परा की शुरुआत है। अगर गिरफ़्तारी एक षड्यंत्र थी तो फिर तो पूरा प्रकरण एक षड्यंत्र था। सड़क पर देश भक्ति के प्रदर्शन से लेकर कचहरी का बवाल तथा भाजपा विधायक द्वारा छात्र की पिटाई से लेकर मिडिया पर हमला। सब किसी गहरी साज़िश का हिस्सा थी। कहीं कोई एक राजनितिक दल दलित शोषित समाज को यह संकेत देने की कोशिश तो नहीं कर रहा है के जैसे सदियों से सर झुका कर जीते आये हो वैसे ही जियो वरना कुचल दिए जाओगे।
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