एक प्याला चाय
एकल अभिनय
मूल कहानी :- कैथरीन मैन्सफील्ड
नाट्य-रूपांतरण :- नीरज हेस्टिंग्स
रोजमेरी फैल। बहुत ही elegantly ड्रेस्ड महिला जिसने एक फ्लोरल फ्रॉक पहन रखी है। सर पर हैट है। हाथ में कीमती बैग झूल रहा है। उसने बहुत ही डेलिकेट से दस्ताने चढ़ा रखे हैं। पैरों में वाइट स्टॉकिंग्स और बेलिस डाल रखी है। वो मंच पर ऐसे टहल रही है जैसे किसी मार्केट में हो। वो दर्शकों से मुखातिब हो कर बड़ी ही अदा से कहती है :
रोजमेरी :- ओफो मुझे ऐसे क्यों देख रहे हैं? ताज्जुब हो रहा है के मैं, यानी रोजमेरी फैल जिसे अगर अपने लिए कोई ड्रेस भी खरीदनी होती है तो पेरिस फ्लाई करती है। वो रोजमेरी फैल, यानी कि मैं इस लोकल मार्केट में क्या कर रही है ? तो पहले पूछिए के मैं अपनी ड्रेस खरीदने पेरिस क्यों जाती हूँ? वो इसलिए, के पेरिस के नए डिज़ाइनर कहते हैं--"हर औरत को अपनी स्टाइल का मालिक होना चाहिए। (गर्व से) और मेरा तो है ही। अरे मेरे घर की हर चीज़ एक्सक्लूसिव है। यहां तक के मेरे घर की चाय भी। अब मैं आपको बताती हूँ के मैं इस मार्केट में क्या कर रही हूँ। वैसे तो ये अपने शहर की एक हाई एन्ड मार्किट है लेकिन मेरा यहां आने का कारण है दॉस्तोएव्स्की। फ्योदोर दॉस्तोएव्स्की। अरे वही क्राइम एंड पनिशमेंट वाले। क्या कहा ? नहीं जानते ? अरे वही रस्सियन नॉवेलिस्ट। फ्योदोर दॉस्तोएव्स्की अपने मनोवैज्ञानिक रूप से गहन और भविष्यसूचक उपन्यासों प्रसिद्ध हैं, जिनमें मानवीय स्थिति, नैतिकता और और आध्यात्मिक संघर्षों का अन्वेषण किया गया है। अब आप पूछेंगे के मेरा इस मार्केट आने का फ्योदोर दॉस्तोएव्स्की से क्या लेना देना। लेना देना है। दॉस्तोएव्स्की कहते हैं "अपनी नज़र उठा कर देखो, दिख जाएंगे वो लोग जिनके बच्चे दवा के अभाव में मर रहे हैं, जिनकी बीबियाँ भूख से मर रही हैं। अगर तुम्हारे पास साधन है तो उनकी मदद करो। अगर ऐसे लोगों की मदद नहीं करते तो समझ लो तुम एक साधन सम्पन्न भिखमंगे हो। अब गरीब ढूंढने मैं पेरिस तो जाउंगी नहीं। इसीलिए इस मार्केट में चली आती हूँ। यहां मिल जाते हैं तमाम गरीब। (लापरवाही से) कर देती हूँ उनकी मदद। (ठंडी सांस ले कर) बड़ा सुकून मिलता है। सच पूछें तो इलीट सर्किल में मेरा सम्मान बढ़ता है। बड़े बड़े कार्यक्रमों में मुझे लोग मुख्य अतिथि बनाते हैं। उन कार्यक्रमों में भी मैं अच्छा ख़ासा डोनेशन देती हूँ। मुख्य अतिथि बनने की कुछ तो कीमत चुकानी होती है। आखिर किसी गरीब को कोई मुख्य अतिथि क्यों बनाएगा ! भले ही गरीब कितना भी टैलेंटेड क्यों ना हो। फिर मैं गरीबों की मदद इसलिए भी करती हूँ क्यों के मैं साधन सम्पन्न भिखमंगन नहीं कहलाना चाहती। गरीबों का भी अजीब हाल है। उनकी जैसे जैसे मदद करो वैसे वैसे उनकी ख्वाहिशें बढ़ती जाती है। अभी जो वैले मेरी कार पार्क करने ले गया है वो चाहता है के मैं उसे एक कार दिला दूँ। ऐसा भला कहीं हो सकता है? चलिए बहुत बातें हो गईं। अब कुछ शॉपिंग कर ली जाए। (कुछ कदम इधर उधर चल कर ऐसा अभिनय करती है जैसे किसी दूकान के सामने पहुँच गई हो और काल्पनिक दुकानदार से बात करती है) सुनो मुझे वो चाहिए और वो। चार गुच्छे उसका दे दो और दूकान में जितने भी गुलाब हैं सब चाहिए। नहीं नहीं। मुझे नीलक नहीं लेने। नीलक भी कोई फूल है। मुझे इसका ना रंग पसंद, ना खुशबू। हाँ वो लाल सफेद ट्यूलिप भी चाहिए। बिल समेत ये सारे फूल मेरे मैंशन पर डेलिवर करवा दीजिए। (दर्शकों से) इतने ढेर सारे फूलों से सजा वैरांडा जब मेरे पति मिस्टर फिलिप फैल देखेंगे तो खुश हो जाएंगे।
मेरे पति मिस्टर फिलिप। आयरन बैरन। एक बहुत अच्छे इंसान हैं। मैं कितना भी, कैसे भी खर्च कर दूँ, कभी नहीं पूछते। इसीलिए तो कहती हूँ के बहुत अच्छे इंसान हैं। उनका सौंदर्य बोध गज़ब का है। और उनका नसीब देखो, के मुझ जैसी साधारण से नैन नक्श वाली लड़की से उनका विवाह हुआ है। वैसे ऐसी बुरी भी नहीं हूँ मैं देखने सुनंने में। उन्हें एक से एक स्लीक, एलिगेंट सी, किसी हॉलीवुड फिल्म की हीरोइन टाइप लड़की मिल सकती थी। कभी किसी पार्टी में, जब कनखियों से उन्हें किसी खूबसूरत महिला को निहारता देखती हूँ तो मेरे तन बदन में आग लग जाती है। पता नहीं ये जलन है या सेंस ऑफ़ इंसेक्यूरिटी। क्या करूँ ? जो है सो है। अरे ! वो देखिये ! जॉनसन कितने तेज़ क़दमों से डग भरता हुआ मेरी तरफ चला आ रहा है। जोहन्सsssssssन। ऐंटीक शॉप का सेल्समेन। अभी मेरे पास आकर पहले मुझे फ्लैटर करेगा, फिर मुझे कोई एंटीक चीज़ दिखाएगा, कहेगा (सेल्समैन के अंदाज़ में)"मैडम। आप तो जानती हैं, मुझे अपनी चीज़ों से कितनी मुहब्बत है। मैं अपनी चीज़ें कभी भी उस शख्स को नहीं बेचता हूँ जो उनकी कद्र नहीं जानता। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिनका टेस्ट आप जैसा रिफाइंड हो। (अपने खुद के अंदाज़ में) वेल मिस्टर जॉनसन ! आज क्या दिखा रहे हैं ? (सेल्समेन के अंदाज़ में) ये देखिए ये ज्वेलरी बॉक्स जो रशिआ के आखिरी ज़ार निकलस द्वितीय ने अपनी ज़रीना को दिया था। (अपने खुद के अंदाज़ में) और उसके बाद रशिआ में क्रान्ति हो गई। क्रांतिकारियों ने ज़ार और उसके परिवार को सज़ा-इ-मौत दे दी। (सेल्समेन के अंदाज़ में) जी मैडम। आपको तो इतिहास का बेजोड़ ज्ञान है। एक आप ही तो हैं जो इस ज्वेलरी बॉक्स की वैल्यू समझ सकती हैं। आप के अलावा ये बॉक्स मैंने किसी को दिखाया ही नहीं। पैक कर दूँ ? (अपने अंदाज़ में) नहीं। (सेल्समैन के अंदाज़ में, जैसे उसे अपने कान पर यकीन ही ना हुआ हो) जी मैडम? (अपने अंदाज़ में) मैंने कहा नहीं। इसे पैक करने की कोई ज़रूरत नहीं। (सेल्समेन के अंदाज़ में) तो क्या मैडम इसे बिना पैकिंग के ले जाएंगी ? हाथ में झुलाते हुए। लोगों को दिखा दिखा कर जलाते हुए ! what an idea madam ! (अपने अंदाज़ में) जिस तोहफे का इतिहास खून से सना हो, वो तोहफा मैं कभी नहीं खरीद सकती। (सेल्समेन के अंदाज़ में ) ले लीजिये ना मैडम ! प्लीज! (अपने अंदाज़ में) no ! नेवर! और बेचारा अपना मन मसोसते हुए वापस लौट गया। अरे ये क्या ! बरसात शुरू हो गई। (अपने हैंडबैग से छाता निकालते हुए) लंदन की बरसात का क्या है ऐतबार (छाता खोल कर लगाती है) शाम की चमक पर जब घटाओं की कालिमा छाती है तो सब कुछ कितना उदास लगाने लगता है। चमचमाते स्ट्रीट लैंप भी बुझे बुझे से लगाने लगते हैं जैसे किसी बात का अफ़सोस मना रहे हों। बस जल्दी से घर पहुंचना है और गर्मागर्म चाय का प्याला गले से नीचे उतारना है। अरे! ये मेरे बगल में आ कर कौन खड़ा हो गया ? एक लड़की। जवान। दुबली पतली। मेरी ही उम्र की। ना हैट ना छाता। बरसात में एक दम भीगी भागी सी। यक ब यक से कहाँ से आ गई ये? शायद मुझसे कुछ कहना चाहती है। सुनूं। देखूं क्या कहती है। (उस लड़की के अंदाज़ में) मैडम क्या मैं आपसे कुछ कह सकती हूँ? क्या आप मुझे एक प्याली चाय के पैसे दे सकती हैं ? इस बरसात में मैं भी एक प्याली चाय पी लूंगी। (अपने अंदाज़ में) कुछ भी हो ये आवाज़ मुझे किसी भिखारन की तो नहीं लग रही है। (उत्साह से) अरे वाह ! इसके पास एक प्याली चाय के भी पैसे नहीं है। कितनी निराली बात है ! अद्भुत ! कितना रोमांचक है ये सब ! ऐसा लग रहा है जैसे दोस्तोवस्की के उपन्यास का कोई पात्र निकल कर शाम के इस धुंधलके में मेरे सामने खड़ा हो। मान लो अगर मैं इसे अपने घर ले जाऊं तो ? मान लो अगर मैं इस लड़की के साथ वो सब करूँ जिसके बारे में मैं उपन्यासों में पढ़ती आई हूँ या नाटकों में देखती आई हूँ ? कितना रोमांचक होगा ना ये सब ! मेरी सभी सखियाँ विस्मित हो कर सुनेंगी जब मैं उन्हें बताउंगी के कैसे मैं इसे घर ले गई। कैसे इसको अपनी टी टेबल पर, उसी गोल टी टेबल पर जो मैंने स्पेशली मिस्टर फिलिप और अपने चाय पीने के लिए बनवाई थी, उस पर उसको चाय सर्व करवाई। (उस लड़की से) सुनो लड़की। क्या तुम मेरे साथ मेरे घर चल कर चाय पीना पसंद करोगी ? अरे !तुम तो घबड़ा गई ! अरे भाई मैं सच कह रही हूँ। चलो मेरे साथ। मेरे घर। मेरी कार में बैठ कर। वहां मेरे साथ एक प्याली चाय पीना। उसे लगा मैं उसे पुलिस के हवाले करने जा रही हूँ। (हंसती है) अरे भाई मैं तुम्हें पुलिस के हवाले क्यों करुँगी ? क्या मैं तुम्हें इतनी निर्दयी लगाती हूँ ? मैं बस इतना चाहती हूँ के तुम चल कर एक प्याली चाय पी मुझे खुश कर दो। साथ साथ मैं तुमसे तुम्हारी दर्द भरी दास्ताँ सुनूंगी। भूखे लोग भरे पेट वालों की बातों में आसानी से आ जाते हैं। सो वो भी आ गई। ना केवल मेरी बातों में, मेरे पंजे में भी। वैले मेरी कार ले आया और कुछ ही पलों बाद हम दोनों बारिश की उस शाम के धुंधलके को चीरते हुए उड़ते चले जा रहे थे। आज इस लड़की को समझ आ जाएगा के जीवन में चमत्कार भी होते हैं। आज साबित कर दूँगी के परीकथाएं सच होती हैं। वो परी वास्तविक थी जिसने राखी को राजकुमारी में बदल दिया था। आज इसको भी समझ आ जायेगा के पैसे वालों के पास भी दिल होता है, सारी औरतें आपस में बहनें होती हैं।
कार मेरे मेंशन पर जा कर रूकती है। फुटमैन दौड़ कर आता है और दरवाज़ा खोलता है। वो फटी फटी आँखों से ये सब देख रही थी। उसके लिए ये सब कल्पना से परे था। वो कैसे यकीन करे के जिस शहर में वो रहती है वहां लोगों के पास इतने बड़े बड़े घर भी हो सकते हैं जहां ठंड की ठिठुरन नहीं, सुविधाओं की गर्मी होती है। जहां बारिश नहीं टपकती, फव्वारे झिलमिलाते हैं।
आओ अंदर आओ। अरे वहां क्यों रुक गई ? अरे डरो नहीं। आ जाओ। आओ मैं तुम्हें अपना बैडरूम दिखाती हूँ। आओ चली आओ, अरे अंदर आओ भी। (हाथ खींच कर अंदर लाती है) ये देखो मेरा बैडरूम। क्यों पसंद नहीं आया? तो फिर ऐसे टुकुर टुकुर क्यों देख रही हो ? ये देखो ये पर्दे। ये मैंने जर्मनी से मंगवाए थे। लाख से रोगन किया हुआ मेरा ये फर्नीचर और उसपर पड़े ये सुनहरे कुशन, फर्श पर पड़ा ये नीला पीला गलीचा और इस सब को गर्म रखती मेरी फायर प्लेस की लपटें। तुम्हें सब पसंद आ रहा है ना। बारिश में भीगे तुम्हारे बाल कितने खूबसूरत लग रहे हैं। अगर तुमने हैट पहनी होती तो ये मज़ा कहाँ मिलता। मेरा भी दिल करता है के बगैर हैट के बाहर निकलूं, कभी बारिश तो कभी धूप का एहसास करूँ, लेकिन कर नहीं सकती। आखिर स्टेटस भी तो कोई चीज़ है। लाओ मैं तुम्हारा कोट उतार दूँ। (उसका कोट उतारती है। चेहरे पर ऐसे भाव जैसे उसे उसके कोट से घिन आ रही हो। उसका वो कोट ज़मीन पर गिरा देती है) मैं तुम्हारे साथ बहुत दया भाव से पेश आ रही हूँ ना। बताना लोगों से के मैंने तुम पर कितनी दया दिखाई। क्या ? क्या कह रही हो? तुम्हें अगर जल्दी ही कुछ खाने को ना मिला तो बेहोश हो जाओगी ! हे भगवान्। मैं भी कितनी लापरवाह हूँ। सबसे पहले तुम्हें चाय पिलानी चाहिए थी। (नौकर को बुलाने के लिए ताली बजाती है। ऐसा अभिनय करती है जैसे जैक नामक नौकर आया हो ) जैक। एक कप चाय। जल्दी। थोड़ी ब्रांडी। तुरंत। (लड़की से) अरे तुम तो रोने लगी ? रो क्यों रही हो ? क्या तुम ब्रांडी कभी नहीं पीती ? सिर्फ चाय पियोगी ? तो इसमें रोने की क्या बात है ? मत परेशान हो। आखिर हम दोनों औरत हैं। औरत ही औरत के साथ खड़ी होती है। मैं तुम्हारी देखभाल करुँगी। अब कभी रोना मत। ज़रा सोचो कितनी अच्छी बात है के तुम्हारी मुझसे मुलाक़ात हुई। अभी हम तुम दोनों बैठ कर चाय पर चर्चा करेंगे। तुम मुझे अपने बारे में सब कुछ बताओगी। मैं वादा करती हूँ के मैं तुम्हारे लिए कुछ ना कुछ इंतज़ाम ज़रूर करुँगी। अब रोना बंद करो। देखो जैक चाय ले आया। मैं अपने हाथ से तुम्हें सर्वे करती हूँ। (प्लेट उठा कर देने का अभिनय करती है) लो ये सैंडविचेस ट्राई करो। इसमें ढेर सारा मख्खन लगा है जो तुम्हें शक्ति देगा। खाओ खाओ। लो और लो। अब ले भी लो। ज़्यादा शर्माओ नहीं। लाओ मैं चाय ढाल देती हूँ। (कप में शुगर क्यूब डालने का अभिनय करती है) मैंने चार क्यूब डाल दिए हैं। कहते हैं शक़्कर ताज़गी देती है। (केतली से चाय ढालने का अभिनय करती है।फिर दूध डालने का। फिर चमचे से सब कुछ मिक्स करने का। चाय लड़की को ऑफर करती है) लो चाय पियो। (वक्फा) पसंद आई ? ये बताओ आज से पहले तुमने आखिरी बार भर पेट खाना कब खाया था ? (चौंक कर) अरे लगता है मेरे हस्बैंड मिस्टर फिलिप आ गए। तुम यही रुको मैं उनका वेलकम कर के अभी आती हूँ। (उठकर दरवाज़े तक जाने का अभिनय करती है, इस कमरे कमरे का दरवाज़ा भेड़ति है। नॉब घुमा कर दूसरे कमरे का दरवाज़ा खोलती है। ) हाय डार्लिंग। क्या ? मेरे बताने से पहले ही नौकरों ने तुम्हें सब कुछ बता दिया। नहीं तुम उससे नहीं मिल सकते। वो घबड़ा जाएगी। बस उसकी एक झलक देखना चाहते हो ? (दरवाज़ा खोलने का अभिनय करती है ) लो दूर से उसे देख लो। बस देख लिया ? (दरवाज़ा बंद करने का उपक्रम करती है ) (व्यंग्य से) ना मेरा हाल पुछा चाल ! एक दम से दो दो सवाल दाग दिए। (बनावटी अंदाज़ में) बताओ कौन है ये? और इस सबका क्या मतलब है ? (हँसते हुए) अरे मैंने उसे curzon स्ट्रीट से उठाया है। उसने मुझसे एक चाय की डिमांड की, तो मैं उसे घर ले आई। मैं क्या करुँगी उसका ? अरे मैं उसके साथ अच्छा व्यवहार करुँगी। उसका ख्याल रखूंगी। कैसे, ये मैं नहीं जानती अभी इसके बारे में कुछ सोचा नहीं है। (भड़कते हुए) क्यों मैं पागल क्यों हूँ? मुझे मालूम था के तुम ऐसा ही कुछ कहोगे। ......... ये सब हो क्यों नहीं सकता ? ये सब हो सकता है क्यों के मैं ये सब करना चाहती हूँ। मैंने दॉस्तोएव्स्की के उपन्यासों में ऐसा होता पढ़ा है। इसीलिए मैंने फैसला किया है की.....क्या?....तुम झूठ बोल रहे हो। (गुस्से में) तुमने आज तक मेरी खूबसूरती की तारीफ नहीं की और आज........आज उस भिखारन के सौंदर्य की तारीफ कर रहे हो ?.....क्यों ना कहूँ उसे भिखारन? भीख मांगते हुए ही तो मेरे पास आई थी !....... तुम उसे देखते ही उसपर मोहित हो गए? तुम्हें शर्म नहीं आती एक क्लासी लेडी की जो की खुद तुम्हारी पत्नी है उसकी तुलना एक वल्गर क्लास की औरत से कर रहे हो?..... भले दोस्तोवस्की कुछ भी लिखे, ये क्लास डिफरेंस कभी खत्म ना होगा। इलीट इलीट रहेगा और वल्गर वल्गर। कहाँ चल दिए ? मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा कर तुम यूं नहीं जा सकते। ......चला गया। अब सीधा लाइब्रेरी में जा कर सिगार फूंकेगा। कह रहा था के वो मुझसे भी ज़्यादा खूबसूरत है। झूठ बोलता है। (सोचते हुए) लेकिन अगर उसने सच कहा हो तो ? वो तो मैं थी जिसने उसपर दया दिखाई। लेकिन अब..... अब लगता है.... वो मेरी दया नहीं, मेरे आत्मसम्मान को छू गई। (धीरे से बैठ जाती है) उसकी आँखों में...... कुछ और था। भूख के अलावा.... शायद आत्मविश्वास ? या...वो चीज़ जो मुझे डराती है। (खड़ी होती है। तेज़ स्वर में खुद से-बेचैनी के साथ तेज़ क़दमों से इधर उधर टहलते हुए ) फिलिप को क्या लगा होगा.....कि मैं बस दिखावा करती हूँ? नहीं, मैं सच में भली हूँ...या...हूँ क्या? रुको पहले उसे भगाती हूँ अपने घर से। (दरवाज़े का नॉब खोल कर कमरे के अंदर जाने का अभिनय करती है) (गुस्से से) लड़की। तुम निकालो यहां से ! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई एक भिखारन होते हुए मुझसे ज़्यादा सुंदर दिखने की। (पर्स खोल कर रुपए निकाल कर हिकारत से ज़मीन पर फेंकती है) उठाओ ये रूपए और कुछ खा लेना। (हैरत से) चली गई? और ये रूपए भी नहीं ले गई !
इति