Thursday, April 28, 2016

जिस प्रकार से शनी शिंगणापुर मंदिर ने देश के संविधान तथा देश के कानून की मर्यादा का सम्मान करते हुवे अपनी सैंकड़ो साल पुरानी परम्परा को बदल कर महिलाओं को प्रवेश की आज़ादी दे दी, उसी प्रकार क्या हाजी अली दरगाह कमेटी अपनी चार साल पुरानी परम्परा को तोड़ कर महिलाओं को दर्शन की आज़ादी नहीं दे सकती . सनद रहे के सन २०११ से पहले हाजी अली दरगाह पर महिलाओं के जाने पर कोई पाबंदी नहीं थी . मैं स्वयं अपने परिवार के साथ दरगाह पर जा चूका हूँ . तब वहां कोई पाबंदी  नहीं थी .  अकस्मात ये पाबंदी कहां से आ गई मैं नहीं जनता किन्तु ये अवश्य जनता हूँ के सामाजिक परम्पराओं में गतिशीलता होनी चाहिये ताकि वो देश कल और परिस्तिथि के साथ कदम ताल कर सकें . 

Saturday, April 23, 2016

मैं नहीं समझता के ईशवर महिला और पुरुष में कोई भेद-भाव करता है, और यदि करता है तो वो ईष्वर नहीं . और यदि नहीं करता तो उसके भवन में औरतों का प्रवेश वर्जित कैसे? जितने भी धर्म-गृन्थ मैंने पढ़े हैं कम से कम उनमें मैंने तो ऐसा कुछ नहीं पढ़ा . तो फिर  औरतो का धर्म स्थलों में प्रवेश वर्जित क्यों ? कहीं ये धर्म के नाम पर पुरुष वरचस्व की निशानी तो नहीं?

Thursday, April 7, 2016

कन्हैया ने देश विरोधी नारा दिया था या नहीं, ये अभी सिद्ध होना बाकि है लेकिन एन आई टी के छात्रों ने निश्च्य ही भारत माता की जय बोली थी . कश्मीर में घुस कर पाकिस्तान परस्तों को मुंह तोड़ जवाब दिया . न बंदूकों से डरे न बम से . लेकिन अफसोस के इन देश भक्तों को अपनी देश भक्ती के लिए तथा-कथित देश-भक्त सरकार से पहले मिलीं लाठियां और फिर अपराधिक मुकदमा .
कन्हैया के नाम पर हाहाकार मचाने वाले नेताओं ने इस घटना को मूक समर्थन दिया तो भक्त भी खामोश हैं . ये एक घटना ही इस बात को सिद्ध करती है के मोदी सरकार की देश भक्ति एक चुनावी स्टंट से ज्यादा कुछ नहीं है . 

Wednesday, April 6, 2016

जे एन यू के छात्रों की गिरफतारी क्यों ?

देश द्रोही थे .

एन आई टी के छात्रों पर लाठीचार्ज क्यों ?

देश भक्त थे .

सरकार वही सोच नई