Tuesday, August 18, 2015

Kabristan

तीन मुट्ठी मिट्टी अपने पती की कब्र में डाल कर मुड़ी ही थी के उसके पैर लड़खड़ा गए। उसे लगा के जैसे वो गिर ही जायेगी के तभी दो मजबूत हांथों ने उसे संभाल लिया। ये हाथ विक्टर के थे।
'संभल कर नैन्सी', विक्टर उसे आगाह करता हुवा बोला।  
 'हाँ, थैंक्यू' - नैंसी ने रुंधे हुवे गले से विक्टर को धन्यवाद दिया।
'आओ तुम्हें तुम्हारी कार  तक पहुंचा दूँ। '
'नहीं में चली जाउंगी। ' नैन्सी ने लगभग सुबकते हुवे प्रतिकार किया।
'नहीं नहीं कोई बात नहीं मैं पहुंचा देता हूँ। '
'क्यों परेशान होते हो?'
'इसमेँ परेशानी की क्या बात है ?'

नैंसी के पति की मिट्टी अभी यूँ तो पूरी तरह से दफनाई भी नहीं गयी थी के सारे रिश्तेदार-नातेदार, दोस्त और पड़ोसी उसकी कब्र के पास से तितर-बितर हो गए थे। कुछ अपने अपने अजीजो की कब्र के पास खड़े ये जताने की कोशिश कर रहे थे के वे उन्हें कितना मिस कर रहें हैं तो कुछ मिटटी डालने से गंदे हो चुके अपनें हाथों को धोने के लिए पानी तलाश रहे थे।  बाकी बचे लोग समूह बना कर राजनीती से लेकर आज शाम होने वाली पीटर की लड़की की शादी में पहुंचने का टाइम फिक्स कर रहे थे। नैंसी जैसे किसी को दिख ही नहीं रही थी।

उधर विक्टर का सहारा लिए नैंसी अपनी कार की ओर बढ़ी जा रही थी।  अब उसके हाथों में एक रुमाल आ चुका था जिससे वो रह रह कर अपनें आँसू भी पोछती जा रही थी।

'अपने आप को संभालो नैंसी।  ऐसा कैसे चलेगा ?' विक्टर ने उसे समझाने की कोशिश की।
'ओ विक्टर............. '
'तुम बिलकुल परेशान न होना' विक्टर ने उसके लिए कार का दरवाज़ा खोलते हुवे कहा।
'हाँ नहीं होउंगी, बिलकुल नहीं होउंगी। ' नैन्सी सीट पर बैठने का प्रयत्न करते हुवे बोली। 'मुझे यहाँ तक सहारा देने के लिए शुक्रिया'
'इसमें शुक्रिया की क्या बात है ? मैं  तो कुछ और भी कहना चाह रहा था '
'क्या?'
'तुम कहो तो मैं पूरी ज़िन्दगी के लिए तुम्हारा सहारा बन जाऊं'
'ओ विक्टर, तुमने बहुत देर कर दी' नैन्सी गहरी साँस छोड़ते हुवे बोली।
'क्या मतलब?' विक्टर से स्वर में हैरत थी।
'मैं पहले ही किसी को हाँ कह चुकी हूँ'
'किसे?'
'जॉन को'
'कब ?'
'अभी थोड़ी देर पहले जब वो मुझे घर से कब्रिस्तान ले कर आ रहा था।'




11 comments:

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    1. Thanks for caring to read my effort and also for appreciating

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  2. GOOD UNEXPECTED END, KEEPING IN MIND TODAYS CULTURE AND IT IS CLOSE TO REALTY ALSO

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    1. Thanks for caring to read my effort and also for appreciating

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  3. Good story Sir..I think it will be best to have a paragraph in the end of the story, concise and precise, which explains your thought on writing the story.

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  4. Varun, I believe that every story should be interpreted by the reader himself as per his experience in life and author should not behave like a tutor.

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  5. Varun, I believe that every story should be interpreted by the reader himself as per his experience in life and author should not behave like a tutor.

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  6. I like the fact that some1 else is also interested in writing in hindi...gud goin sir jee

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  7. Ananya, I have always been writing in Hindi, in newspapers, magazines etc. and now this blog. You may not have come to know about it but your father knows this very well.

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