गुड वर्क
नीरज हेस्टिंग्स
नर्सिंग होम में अफरा तफरी का माहोल था। मरीजों के तीमारदार डरे सहमें इधर उधर दुबके हुवे थे। यकायक दरोगा जी अपनी मोटर साइकिल से वहां पहुंचे। उन्हें खबर लग चुकी थी के तीमारदारों का गुस्सा अपने मरीज की मौत पर भड़का हुवा था। मरने वाले के बेटे 'प्रमोद' का इल्ज़ाम था के उसके बाप की मौत गलत इंजेक्शन देने से हुई है। जबकी नर्सिंग होम के डाक्टरों का कहना था के मरीज बहुत ही क्रिटिकल हालत में वहां लाया गया था और उन्होंने उसे बचाने का पूरा प्रयास किया था। मरीज की वास्तविक स्तिथि के बारे में परिवार को बताया जा चुका था।
दरोगा जी ने पहुंचते ही सबको डपटा, फिर प्रमोद को विस्वास दिलाया के उसके साथ इंसाफ होगा। दरोगा जी डाक्टर के चेंबर के अंदर चले गए और थोड़ी देर बाद प्रमोद को भी अंदर बुला लिया। कुछ देर बाद चेम्बर का दरवाज़ा खुलता है और सब संतुष्ट। डॉक्टर साहब संतुष्ट थे के नर्सिंग होम की रेप्युटेशन बच गयी। प्रमोद इसलिए संतुष्ट था के उसने केवल नर्सिंग होम का बिल माफ करवा लिया अपितु दस हज़ार रुपय नगद भी झटक लिये। आखिर इसीलिए तो उसने सारा नाटक रचा था, वरना बाप तो महीनों से बीमार था और बिना इलाज के मर रहा था। दरोगा जी इसलिए संतुष्ट थे के उनकी जेब भारी हो चुकी थी और कैरियर में उनके गुड वर्क के नंबर भी जुड़ गए थे।
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