Saturday, December 12, 2015

सैंटा क्लॉज़ और क्रिसमस

                                                 क्रिसमस और सेंटा
                                सेंटा एक किवदंती मात्र, कोई देवता नहीं

जैसे ही दिसंबर का महीना आता है, विश्व भर में क्रिसमस की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।  इसी के साथ हर पेट्रोल-पम्प, हर शॉपिंग मॉल, स्कूलों में मनाये जाने वाले उत्सव, विज्ञापनों इत्यादि में जो चीज़ सबसे ज़्यादा ध्यान खींचती है वो है कंधे पर तोहफों का झोला टांगे, लाल लबादे में लिपटा, सफेद दाढ़ी वाला हंसमुख बूढ़ा जिसे दुनियां सैंटा क्लॉज़ के नाम से जानती है। लेकिन शायद बहुत कम ही लोगों को पता है के सैंटा क्लाज़ केवल एक मिथक है जिसे इसा मसीह के जन्म से कुछ लेना देना नहीं है। पवित्र बाइबल से भी सैंटा क्लाज़ का कोई लेना देना नहीं है।  अगर मैं ये लिखूं के सैंटा क्लाज़ मार्केटिंग स्ट्रैटजी का प्रोडक्ट हैं तो शायद अतिश्योक्ति ना होगी।
आइये जानें सैंटा क्लॉज़  का कॉन्सेप्ट क्या है।  आधुनिक सैंटा क्लॉज़  का उदय उन्नीसवीं शताब्दी में डच नाविकों के साथ संत निकोलस की कथा अमेरिका पहुँचने हुवा था।  किन्तु सैंटा क्लॉज़ को विश्व प्रसिद्ध करने में कवि क्लेमेंट क्लार्क मूर की कविता 'अ विजिट फ्रॉम सेंट निकोलस' जिसे हम 'द नाइट बिफोर क्रिसमस' के नाम से भी जानते हैं, ने एक बहुत बड़ी भूमिका निभायी।  कलाकार टॉमस नास्ट ने सैंटा क्लॉज़ को वो रूप दिया जो आज हम देखतें हैं।
फिर आई सेंटा क्लाज़ के मार्केटिंग की बारी जो निभायी कोका-कोला ने। सन १९३० में कोका-कोला ने अपने प्रोडक्ट के विज्ञापनों में सैंटा क्लाज़ के साथ क्रिसमस का इतना प्रचार किया के पूरी दुनिया इस भरम में जीने लगी के क्रिसमस मतलब सैंटा क्लाज़, या सैंटा क्लॉज़ मतलब क्रिसमस।

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