Friday, August 14, 2015

Girgitani Joote

                                                       गिरगिटानी जूते
                                                                    लघु नाटिका
                                                                           लेखक नीरज हेस्टिंग्स

                                                          दृष्य : सड़क
                                                          समय : करीब प्रातः १० बजे

एक भिखारी भीख माँगते हुवे प्रवेश करता है

भिखारी : ए माई, कुछ खाने को दे न माई।  दो दिनों से भूखा हूँ माई। तेरे बच्चे जिएंगे माई।  तेरे घर में
               खुशियाली आएगी माई।

                    अध्यापक का प्रवेश।  भिखारी उसे देख कर उससे भी भीख माँगता है

भिखारी : ए मास्टर साहब।  कुछ दे न मास्टर साहब।

अध्यापक :क्यूँ दूँ ?

भिखारी : तेरे बच्चे जिएंगे मास्टर साहब।

अध्यापक : नहीं दूँगा तो क्या मर जायेंगे ?

भिखारी : अरे गरीब की दुआ लगेगी तो ज्यादा जिएंगे।

अध्यापक : तुम्हें भीख मांगते शर्म नहीं आती ?

भिखारी : शर्म कहे की मास्टर साहेब ? भीख तो बड़े बड़े नेता माँगते है।  जब चुनाव आता है तो वोट की भीख।
               जब किसी दूसरे देश जाते है तो सहयोग की भीख।  जब दूसरे देश का नेता हमारे यहाँ आता है तो
               डॉलर की भीख।  स्स्स्सब भिखारी हैँ।

अध्यापक : बातें तो तू बड़ी बड़ी करता है।  कोई काम क्यों नहीं करता ?

भिखारी : आप अपने स्कूल में काम दिला दो।

अध्यापक : तू पढ़ा लिखा नहीँ है।

भिखारी : चपरासी ही बनवा दो।

अध्यापक : वेकेंसी नही है।

भिखारी : अपना घरेलू नौकर ही बना लो।

अध्यापक :हाँ ये ठीक है।  लेकिन उससे पहले पुलिस वैरिफिकेशन करवाना पड़ेगा। रेजिडेंस प्रूफ है तेरे पास ?

भिखारी ; जब रेजिडेंस ही नहीं तो प्रूफ कहे का ?

अध्यापक : डी एल ?

भिखारी : उसके लिए आइ डी चाहिये।

अध्यापक : तो बनवा लो न आई डी।

भिखारी : उसके लिए वोटर कार्ड चाहिए।

अध्यापक :तो वोटर कार्ड बनवा लो।

भिखारी : उसके लिए राशन कार्ड चाहिए।

अध्यापक : (झुँझला कर) तो राशन कार्ड क्यों नहीँ बनवा लेते ?

भिखारी: उसके लिए रेजिडेंस प्रूफ चाहिए।

अध्यापक : और वो तुम्हारे पास है नहीं।

भिखारी : देखा ना मास्साब, प्रजातंत्र में प्रजा किस तंत्र में फँस जाती है।  आप होते तो हैं लेकिन होते नहीं,
               अगर आप के पास आपके अपने होने का प्रमाण नहीं होता।  अब बताइये, आप कहते हैं काम करो।
               कैसे करें काम ? कौन देगा हमें काम ? वैसे भी हमारा ये भीख मांगने का बिजनेस बहुत बढ़िया है।
               जीरो इन्वेस्टमेंट, जीरो रिस्क, प्रॉफिट हंड्रेड पर्सेंट।

अध्यापक :अगर इसी तरह भीख मांगते रहोगे तो तुम्हारे बच्चों का क्या होगा ? उनका भविष्य क्या होगा?

भिखारी : हमारे बच्चों की चिंता न करें।  वो अभी से मुझसे आगे निकल गए हैं।

अध्यापक : (आश्चर्य से ) तुम्हारे बच्चे तुमसे आगे निकल गए ?

भिखारी : (गर्व से) जी हाँ।

अध्यापक : वैरी गुड वैरी गुड।  क्या करते हैं वो ?

भिखारी :भीख मांगते हैं।

अध्यापक : (घृणा से) भीख मांगते हैं ? फिर तुमसे आगे कैसे निकल गए ?

भिखारी : मैं तो बस इस छोटी बाज़ार में भीख मांगता हूँ लेकिन मेरे बच्चे---वो---वो बिग बाजार में भीख मांगते
              हैं।

अध्यापक : बहुत खूब बहुत खूब।  बड़े लोग आते हैं वहां।  खूब भीख मिलती होगी ?

भिखारी : (उदासी से) अजी कहाँ साहब ! जितना बड़ा आदमी उतना छोटा दिल। उनकी जेब से पैसा ही नहीं
               निकलता।

अध्यापक : फिर ?

भिखारी : लेकिन हमारी औलादें भी इंटरनेटी औलादें हैं।  उन्होंने उसका भी तोड़ निकल लिया।

अध्यापक : क्या तोड़ ?

भिखारी : अगर कोई नया जोड़ा आता है तो वो उसके पीछे ही पड जाते हैं।  उन्हें तब तक आपस में बात नहीं
               करने देते जब तक के वो मोती रकम भीख में नहीं दे देता।

अध्यापक : ये तो सरासर ब्लैकमेंलिंग है।

भिखारी : आप इसे ब्लेकमेलिंग कहते होंगे, हम तो इसे इनोवेटिव मार्केटिंग कहते हैं।

अध्यापक  : अच्छा मैं चलता हूँ।  स्कूल जा कर साइन कर के फौरन घर वापस लौटना है।

भिखारी : साइन कर के फौरन घर वापस लौटना है ? पढ़ायेंगे नहीं बच्चों को?

अध्यापक : क्लास में पढ़ाने लगा तो कल चुकी मेरी कोचिंग। (जल्दी से बाहर निकल जाता है)

भिखारी : वह मास्टरसाहब! सही कहा है किसी ने 'पर उपदेश कुशल बहुतेरे '

तभी दो विपरीत दिशाओं से दो माफिया गैंग एक दूसरे पर गोलियां क्लाते हुवे मंच पर आते हैं। भिखारी डर के मारे  बैठ जाता है।  तभी एक माफिया डॉन को गोली लग जाती है और वह गिर कर मर जाता है।  उसका गैंग भाग जाता है।  जिस माफिया डॉन ने उसको गोली मारी  थी वह उसकी लाश के पास जा कर उसको ठोकर मारता है और अपने आदमियों से कहता है

डॉन; जल्दी से इसकी पिक क्लिक कर के उसे फेस बुक पर अपलोड करो।

आदमी : इस बॉस

उसका आदमी पिक क्लिक करता है तभी डॉन की नज़र भिखारी पर पड़ती है

डॉन : अरे बादशाओं, आप यहां क्या कर रहे हो  ?

भिखारी : (डरते हुवे) जी में बादशाह नहीं भिखारी हूँ।

डॉन : अरे सुना तुम लोगों ने ? ये बादशाह खुद को भिखारी बता रहा है।

                             सब हँसते हैं

डॉन : हाँ तो बद्शाओ, अभी क्या देखा आपने ?

भिखारी : जी कुछ नहीं।

डॉन : अंधे हो ?

भिखारी : जी नहीं।

डॉन : तो फिर देखा कैसे नहीं ? तुमने देखा के दिलावर सिंह ने अकेले ही ------

सब आदमी : अकेले नहीं हम सब के साथ ------

डॉन : हाँ वही -----डॉन माई का लाल -------

सब आदमी कोरस में : बॉस, माई का लाल नहीं माइकल।

डॉन : हाँ वही..... लोहा लेते हुवे अपने आदमियों के साथ अकेले ही गोली मर दी।

भिखारी : किस्से कहना है ?

डॉन: पुलिस से

भिखारी : फिर तो पुलिस आपको पकड़ लेगी।

डॉन: ओ नइँ बद्शाओ---माई के लाल को गोली मार  के साडा इण्डिया में वर्ल्ड फेमस हो जायेगा।  पहले
         पॉलिटिकल पार्टी वाला लोग हमें विधायक बनाएगा फिर सांसद, फिर मिनिस्टर।  फिर हम इस देश
        का कानून बनाएगा। वैसे भी साला आजकल इण्डिया में कानून बनाने वाला बनने के लिए पहले कानून
        तोड़ने वाला बनना ज़रूरी है।  आज हम तुम्हारी किस्मत भी बदल देंगे----तुम नंगा पांव है---इस आदमी
        का जूता पहन लो।  क्या याद करोगे तुम---दिलदार दिलावर से पाला पड़ा था।  चलो ओय सब।

सब बाहर निकल जाते हैं। भिखारी डरते डरते लाश के जूते निकल कर पहनता है। जैसे जैसे वह जूते पहनता जाता है वैसे वैसे उसके भाव एक दयनीय भिखारी के भाव से एक खूंखार डॉन के भाव में बदलते जाते हैं। वो
डॉन की तलाशी लेता है।  डॉन की जेब से गण निकलती है। अब उसके चेहरे पर अपराधी के भाव हैं।  वो डॉन का कोट भी उतार कर पहन लेता है।  अब वो भिखारी नहीं एक खूंखार अपराधी है।

                                       तभी अध्यापक आता है

भिखारी : कौन है बे ?

अध्यापक : ये कैसे बात कर रहे हो तुम?

भिखारी : ये इच अपुन का इस्टाइल है।

अध्यापक : साले भिखारियों का भी स्टाइल होने लगा?

भिखारी : लगता है पहचानता नहीं है मुझे !

अध्यापक : पहचानता हूँ पहचानता हूँ, फुटपाथ के भिखारी।

                   भिखारी ग्न निकल कर मास्टर के माथे पर लगा देता है

भिखारी ; औकात मैं ! औकात में ! अगर ये पिट बोल गयी तो साले फोटो बन कर टंग जाओगे।  जानता नहीं
               मैं कौन हूँ ? मैं हूँ माइकल।

अध्यापक ; कौन माइकल साहब ?

भिखारी : माइकल मार्कोस।  इस इलाके का सबसे बड़ा डॉन। ड्रग्स, हथियार, किडनैपिंग धंधा है मेरा।  जनता
               हूँ के ये गंदा है, पर क्या करूँ फिर भी ये धंधा है।  इधर अपुन पंटर लोग का वेट कर रइला है।

अध्यापक : (हकलाते हुवे) इस आदमी को आपने मारा ?

भिखारी : नाआआयी।  दिलावर गैंग का काम है ये। अब अपुन बदला लेगा।

अध्यापका : कुछ देर पहले तो आपने कहा था के आपका कोई रेज़िडेंस नहीं है ?

भिखारी : डॉन लोगों का रेजिडेंस नहीं, डेन होता है डेन।  इस शहर में अपुन का दस दारू का अड्डा, चार
               जुवाखाना और ४० पंटर लोगों की गेंग है गेंग। बेटिंग करता है बेटिंग ?

अध्यापक : जी नहीं, मैं सिर्फ बॉलिंग करता हूँ

भिखारी : ठीक करता है।  वरना तेरा ये झोला झंडा तक बिक जाता। और सुन, आज अभी जो तूने देखा है वो
               किसी को बोलना मत, वरना तेरा भी यही अंजाम होगा।  (बेचैनी से) ओ इन जूतों में लगता है के
                कोई कीड़ा घुस गया है।

                  ज़मीन पर गन रख कर जूते उतारता है जैसे ही वो जूते उतारता है वो वापस भिखारी बन जाता है।

भिखारी : ए माई, कुछ खाने को दे ना माई।  भगवान भला करेगा माई।

                   अध्यापक आश्चर्य से उसे देखता है फिर जल्दी से कांपते हाथों से गन उठा लेता है

अध्यापक : अभी देता हूँ तुझे खाने को।  गोली खायेगा ?

भिखारी : क्यों एक भिखारी से मज़ाक करते हो मास्टर ?

अध्यापक : भिखारी? या माइकल मार्कोस ?

भिखारी : कौन माइकल? कौन मार्कोस?

अध्यापक :ड्रग्स, हथियार, किडनैपिंग, ४० पंटर लोगों का गैंग ! हैं ?

भिखारी : ये क्या बोल रहे हो मास्टर? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा ?

अध्यापक : अभी सब समझ में आता है।  इस आदमी को तूने मारा है। अब चल पुलिस स्टेशन। तुझे परमानेंट
                  एड्रेस दिलवाता हूँ।

भिखारी : ये आप क्या कह रहें हैं ? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है।

अध्यापक : अभी सब समझ में आता है। चल पहन जूते।  (चिल्ला कर) पहन !

                    भिखारी धीरे धीरे जूते पहनता है।  जैसे जैसे वो जूतों में पैर डालता है वैसे वैसे उसके चेहरे के भाव
                     बदलते जाते हैं। जैसे ही वो जूते पहन लेता है उसके भाव वापस गैंगस्टर के भाव में बदल जाते
                     हैं।  वो अध्यापक को थप्पड़ मारता है।  अध्यापक ज़मीन पर गिर जाता है। गन भिखारी के पैर
                     के पास गिरती है।

भिखारी : (गन उठाते हुवे) माइकल से टककर ? (अध्यापक को गन पॉइंट पर लेते हुवे) मुझे गन दिखता है ?
               अब तू नहीं बजेगा !

अध्यापक : मुझे माफ कर दो माइकल भाई !

भिखारी : कल याद कर अपने खुदा को! (उसके माथे पर गन रखता है लेकिन जैसे ही वो उसे शूट करने चलता
               है उसके जूतों में फिर प्रॉब्लम होती है) ओह ! ये जूते ! (पिस्तौल खोंस कर जूते उतारता है, उतारते ही
               फिर से भिखारी बन जाता है)

भिखारी : ए माई ! चार दिनों से भूखे भिखारी पर कुछ तो तरस खाओ माई। ए माई, कुछ तो खाने को दो न
               माई।  ए माई.……

अध्यापक : (स्वयं से) जैसे ही ये अपने जूते उतारता है वापस अपनी औकात पर आ जाता है।  अगर इससे
                  इसके जूते छीन लियें जाएँ तो मामला बन सकता है।

भिखारी : (जैसे ही उसकी नज़र जूतों पर पड़ती है वो ख़ुशी से चीख उठता है) जूतेएएएएए !

अध्यापक : खबरदार।  उन जूतों को हाथ मत लगाना !

                   भिखारी जल्दी से जूतों में पैर डालता है। उसके भाव बदल जाते हैं। वो वापस गन निकालता है

भिखारी ; तू अभी तक ज़िंदा है।  कल मरने को तैयार हो जा !

अध्यापक : (रोते हुए) मैनें आपका क्या बिगाड़ा है ?

                        भिखारी अध्यापक पर निशाना साधता है

अध्यापक ; (रोते हुवे) मुझे मत मारो प्लीज़ !

                        भिखारी की उँगलियाँ ट्रिगर पर कसती हैं

अध्यापक : (रोते हुऐ) मैं मरना नहीं चाहता !

                          तभी दिलावर का गन लिए हुवे प्रवेश

दिलावर : ओ बादशाहों।  अभी यहीं हो ?ये क्या गन शन तान रखी है ?

भिखारी : (गन दिलावर की तरफ तान कर दाँत पीसते हुवे) दिलावर ! अपनी मौत के लिये तैयार हो जा !

दिलावर : ओय ! ये भिखमंगा डॉन की भाषा बोल रहा है !

                      दिलावर भिखारी की तरफ गन तानने की कोशिश करता है लेकिन भिखारी पहले ही उसे गोली
                      मार देता है।  दिलावर मर जाता है।  अध्यापक बेहोश हो जाता है

भिखारी : अगर चलानी है तो गोली चलाओ ज़बान नहीं।

                       पिस्तौल की नाल में फूंकता है


                                       फ्रीज़

नोट : यह नाटक वीरेन्द्र स्वरूप पब्लिक स्कूल द्वारा आयोजित अंतर-विद्यालय नाट्य प्रतियोगिता २०१४ में
          प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर चुका है










2 comments:

  1. Replies
    1. Thanks for caring to read and to comment. Please my short story 'kabristan' and give your review

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