Thursday, April 28, 2016

जिस प्रकार से शनी शिंगणापुर मंदिर ने देश के संविधान तथा देश के कानून की मर्यादा का सम्मान करते हुवे अपनी सैंकड़ो साल पुरानी परम्परा को बदल कर महिलाओं को प्रवेश की आज़ादी दे दी, उसी प्रकार क्या हाजी अली दरगाह कमेटी अपनी चार साल पुरानी परम्परा को तोड़ कर महिलाओं को दर्शन की आज़ादी नहीं दे सकती . सनद रहे के सन २०११ से पहले हाजी अली दरगाह पर महिलाओं के जाने पर कोई पाबंदी नहीं थी . मैं स्वयं अपने परिवार के साथ दरगाह पर जा चूका हूँ . तब वहां कोई पाबंदी  नहीं थी .  अकस्मात ये पाबंदी कहां से आ गई मैं नहीं जनता किन्तु ये अवश्य जनता हूँ के सामाजिक परम्पराओं में गतिशीलता होनी चाहिये ताकि वो देश कल और परिस्तिथि के साथ कदम ताल कर सकें . 

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