Saturday, April 23, 2016

मैं नहीं समझता के ईशवर महिला और पुरुष में कोई भेद-भाव करता है, और यदि करता है तो वो ईष्वर नहीं . और यदि नहीं करता तो उसके भवन में औरतों का प्रवेश वर्जित कैसे? जितने भी धर्म-गृन्थ मैंने पढ़े हैं कम से कम उनमें मैंने तो ऐसा कुछ नहीं पढ़ा . तो फिर  औरतो का धर्म स्थलों में प्रवेश वर्जित क्यों ? कहीं ये धर्म के नाम पर पुरुष वरचस्व की निशानी तो नहीं?

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