जल संचयन पर लिखित नुक्क्ड़ नाटक
वर्षा मंगल
सारे कलाकार नाचते हुए आते हैं
कोरस :- काले मेघा पानी दे
पानी दे गुड़ धानी दे
या मेरे मौला पानी दे
चुटकी रत्ती पानी दे
कानी कौड़ी खेत मां
पानी गिरे रेत मां
कानी कौड़ी खेत माँ
पानी गिरे रेत माँ
सब बैठते हैं कलाकार १ खड़ा गाता रहता है
कलाकार १:- गगरी है छूछी बैल हैं पियासे (बैठता है)
महिला कलाकार १:- भर गगरी जल लाऊँ कहाँ से (बैठती है)
कलाकार २ :- फसल बुआइया के ऊजर साफा (बैठता है)
कलाकार ३:- गुरिया की चूनर धानी रे
सब नाचते है
कोरस :- काले मेघा पानी दे
पानी दे गुड़ धानी दे
या मेरे मौला पानी दे
चुटकी रत्ती पानी दे
काले मेघा पानी दे
पानी दे गुड़ धानी दे
सब बैठते हैं। महिला कलाकार तथा कलाकार एक खड़े होते हैं
कलाकार १;- मां ये कौन लोग थे और क्यों नाच गा रहे थे ?
म. कलाकार :- बेटा ये हमारे लोक कलाकार थे जो नाच गा कर काले मेघ से पानी बरसाने की प्रार्थना कर
रहे थे।
कलाकार १ :- तो क्या इनके इस तरह से नाचने गाने से मेघ बरस जाते हैं ?
म. कलाकार :- ऐसी हमारी लोक मान्यता तो थी और शायद बरस भी जाते होंगे। लेकिन अब ऐसा हो,
ये मुश्किल है।
कलाकार १:- पहले बरस जाते थे तो अब क्यों मुश्किल है मां ?
म.कलाकार :- क्यों के पहले हम प्रकृति की पूजा करते थे, इसलिए प्रकृति भी हमसे स्नेह करती थी,
अब हम प्रकृति से खिलवाड़ करते है, इसलिए प्रकृति ने भी हमसे स्नेह करना बंद कर
दिया है।
कलाकार १;- हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ क्यों करते हैं मां ?
म. कलाकार :- अपने स्वार्थ के लिए
कलाकार १:- कैसा स्वार्थ मां ?
म.कलाकार :- अनेकों स्वार्थ हैं
कलाकार १:- जैसे ?
म.कलाकार :- जैसे पेड़ों को ही ले लो। हमने पेड़ो की अंधा धुंध कटाई की। अपने कंक्रीट के बने घरों को
सजाने के लिए इस हरी भरी वसुंधरा को उजाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जैसे जैसे
हमारे फ़र्नीचर बनते गए वैसे वैसे हमारी धरती मां बंजर होती चली गयीं।
सभी कलाकार उठ कर नाचने लगते है
कोरस:- काले मेघा काले मेधा पानी तो बरसाओ
बिजुरी की तलवार नहीं बूंदों के बान चलाओ
घनन-घनन घिर-घिर आये बदरा
घन घनघोर कारे छाये बदरा
धमक-धमक गूंजे बदरा के डंके
चमक-चमक देखो बिजुरिया चमके
मन धड़काये बदरवा, मन धड़काये बदरवा
मन-मन धड़काये बदरवा
कोरस :- अरे ! अरे ! अरे ! देखो वो देखो बदरा सारे लौटे जा रहे हैं।
सब चारों ओर बादलों को पकड़ने भागते हैं। लेकिन पकड़ नहीं पाते। सब थक कर खड़े होजाते हैं। सब की गर्दन झुकी हुई, धनुष के आकार में पीठ झुकी हुई और सबके हाथ घुटनो पर। सब ढाप की थाप पर सीधे होते हैं।
कलाकार ३;- प्यारी बहनो और प्यारे भाइयों
कलाकार ४:- हरिजनों और नाइयों
कलाकार ५:- क़ुतुब की मीनारों और लाल किले की खाइयों
कलाकार ६:- मेहरबान कदरदान
कलाकार ७:- जेब कतरों से सावधान
कलाकार ८:- सेठ आनंदराम जयपुरिया पब्लिक स्कूल कैंट कानपुर पेश करते हैं, नुक्क्ड़ नाटक
कोरस :- वर्षा मंगल
सब बैठते है। चार कलाकार दौड़ कर दुपट्टों की सहायता से टी वी सेट बनाते है जिसके पीछे न्यूज रीडर बैठा है।
रीडर :- और अब मौसम। आज जुलाई की तेरहवीं तारीख हो गई और बारिश का दूर दूर तक नामों निशान
नहीं है। कभी कभार छिट पुट बादल आते भी हैं तो वापस लौट जाते हैं। देश में सूखे जैसी स्थिति
बन रही है। खरीफ की बुआई काफी पिछड़ चुकी है। अगर एक हफ़्ता और बारिश नहीं हुई तो
स्थिति एक विकराल रूप ले सकती है।
सब कलाकार दौड़ कर बैठ जाते है। दो महिला कलाकार उठती हैं।
म. कलाकार १:- का बहिनी। सावन निकला जा रहा है लेकिन भगवान बरस ही नहीं रहे हैं।
म.कलाकर २:- हमारे जमाने में तो आधे आषाढ़ से ही बारिश शुरू हो जाती थी।
म.कलाकार १ :- आहा ! जेठ की प्रचन्ड गर्मी के बाद आषाढ़ की फुहारों का क्या कहना !
म.कलाकार २ :- आषाढ़ के महीने में ही में तो कालीदास ने मेघ दूत की रचना की थी।
म.कलाकार १:- जल्दी बारिश शुरू हो तो पेड़ों पर झूले पड़ें।
म,कलाकार २:- किस दुनिया में जी रही हो बहन ?
म.कलाकार १:- क्यों
म.कलाकार २:- अब पेड़ बचे ही कहाँ हैं जिनपर झूले पड़ेंगे। विकास की अंधी दौड़ में कभी सड़कें चौड़ी करने
के नाम पर तो कभी नई इमारतें बनाने के नाम पर सारे पेड़ों को काट दिया गया है।
म.कलाकार १ :- सही कह रही हो बहन। शहरों में तो पेड़ बचे ही नहीं हैं।
म.कलाकार २:- तो गावों में कौन से पेड़ बच गए। वहां भी यही हाल है। लोगों ने पेड़ या तो आरा मशीन वालो को
बेच दिए फिर ईंधन की तरह चूल्हे में जला दिए।
म.कलाकार १ :- तो क्या झूला डालने अब जंगल जाना पड़ेगा ?
म.कलाकार २ :- वहां टिंबर माफिया पेड़ काटे डाल रहा है।
म.कलाकार १ :- इसके खिलाफ सरकार को कोई क़ानून बनाना चाहिए।
म.कलाकार २:- क़ानून तो बहुतेरे हैं, लेकिन माफिया के हाथ क़ानून से भी ज़्यादा लम्बे हैं।
म.कलाकार १ :- लेकिन पेड़ो पर तो चिर्रअइया अपना घोंसला बनाती है। अगर पेड़ नहीं बचे तो वो कहाँ रहेंगी ?
म. कलाकार २:- अब गौरइया दिखती हैं कहीं ?
म.कलाकर १:- नहीं।
म.कलाकार २;- गिद्ध भी खत्म हो चुके है।
म.कलाकार१ :- अरे बाप रे !
म. कलाकार २:- इसके अलावा और भी कई चिड़िये हैं जो गायब हो रही हैं
म.कलाकार १ :- जैसे ?
म.कलाकार २ :- जैसे बत्तख है, बगुला है, सारस है
म. कलाकार १ :- हे राम ! ये सब पेड़ों के कटने के वजह से ?
म. कलाकार २:- हाँ
कलाकार ३ व ४ उठते है तथा ये दोनों बैठती है।
कलाकार ३:- देखा आपने। पेड़ों के कटने के वजह से ना केवल हमारी सांस्कृतिक परम्पराएं समाप्त हो रही है
अपितु पक्षियों, कीट पतंगों की अनेकों प्रजातियां भी लुप्त हो रहीं हैं या लुप्त प्राय हैं।
कलाकार ४ :-वो देश जहां पेड़ों की पूजा की जाती थी उस देश में आज पेड़ों को नष्ट किया जा रहा है।
कलाकार ३:- वो पेड़ जोहमारे जीवन के कारक हैं, उन्हें ही आज नष्ट किया जा रहा है।
कलाकार ४:- ये बताने की आवश्यकता नहीं हैके पेड़ों के द्वारा ही हमें जीवन दायनी ऑक्सीजन मिलती है।
कलाकार३:- पेड़ पर्यावरण को शुद्ध रखते हैं।
कलाकार४:- पेड़ ट्रांस्पिरेशन अर्थार्तवाष्पोसर्जन के द्वारा वातावरण को ठंडा रख कर प्राकृतिक एयर
कंडीशनर का ही काम नहीं करते बल्कि वर्षा के माध्यम से धरती की प्यास भी बुझाते हैं।
कलाकार ३ :- बच्चें पेड़ का विकेट बना कर क्रिकेट भी तो खेलते हैं।
कलाकार४ :- लेकिन अफ़सोस के हम प्रति वर्ष करीब १५ लाख पेड़ो की बली ले लेते हैं।
कलाकार ३:- १९९० से २०१५ के बीच विश्व स्तर पर करीब ३ % जंगल कम हो गए थे।
कलाकार४:- लेकिन अच्छी बात बात ये है के हमारे भारत में स्थिति इससे बिलकुल उलटी है।
कलाकार ३ :- हमारे भारत में वन छेत्र १% प्रति वर्ष की गति से बढ़ रहे हैं।
कलाकार४:- ये है हमारा इंडिया।
कलाकार ३:- देन लेट उस रॉक
सब नाचते गाते हैं।
गीत :- घोड़े जैसी चाल हाथी जैसी दुम। ....
गीत बदलता है
गीत :- मौनो मोर मेघेरो शोंगे
गीत बदलता है
गीत :- मइया ओ गंगा मइया
कलाकार ५-६ को छोड़ सभी बैठते हैं।
कलाकार५:- हे राम ! गंगा मइया में तो बिलकुल पानी ही नहीं है।
कलाकार ६:- वर्षा ना होने के कारण मइया तन्वंगी सी हुई पड़ी हैं।
कलाकार५ :- केवल यही एक कारण नहीं है गंगा मइया में पानी कम होने का।
कलाकार६;- तो फिर ?
कलाकार५ :- बहुत से कारण हैं।
कलाकार६:- जैसे ?
कलाकार ५:- गंगा मइया का ८०% पानी सिंचाई के लिए चुरा लिया जाता है बाकी बचा कुचा पानी हाइड्रो पावर
स्कीम्स के लिए। इसी लिए सर्दियों और गर्मियों के मौसम में ऋषिकेश से अलहाबाद के बीच गंगा
में गंगा जल होता ही नहीं है। और जिस पानी को हम गंगा जल समझ कर इस्तेमाल करते हैं वो
दरअसल सिर्फ सीवेज का पानी होता है।
कलाकार ६:- लेकिन भइया, सिंचाई भी तो ज़रूरी है।
कलाकार ५:- हाँ ज़रूरी है, बहुत ज़रूरी है, लेकिन समझदारी से। क्या तुम्हें पता है के सिंचाई के वास्ते लिए गए
कुल पानी का ५०% तो हम उसके वाष्पीकरण के कारण खो देते हैं जिसका हमें कोई भी लाभ
सिंचाई में नहीं मिलता।
कलाकार ६:- कारण ?
कलाकार ५:- कारण हमारी पुरानी पड़ चुकी सिंचाई पद्धति।
कलाकार५ :- और मइया को इतना गंदा किसने कर दिया ?
कलाकार६:- इसके भक्तों ने
कलाकार५:- क्या मइया को उसके भक्तों ने ही गंदा कर दिया ?
कलाकार६:- हाँ। कभी श्रद्धा और आस्था के नाम पर, तो कभी विकास के नाम पर। कभी भक्तों ने मइया को
फूल, नारियल, मूर्तियां और अस्थियां डाल कर गंदा किया तो कभी अपना मल-मूत्र, चिकित्स्कीय
तथा औध्योगिक कचरा डाल कर मैला किया। जिस गंगा मइया के जल से हम आचमन करते
हैं उसी मइया के किनारों पर बैठ कुछ मूर्ख सौच करते हैं। वो गंगा मइया जिसका पानी
कभी अमृत माना जाता था आज उसी के पानी को लगातार पीने से हेपटाइटिस, टाइफाइड,
कॉलरा, अमीबिक डिसेंट्री के साथ साथ तमाम चर्म रोगों के होने की भी संभावना बनी रहती हैं।
फिर भी मइया कुछ नहीं कहती बल्कि बड़े प्यार से हमें गले लगाए हमारे पापों को धोती रहती है।
कलाकार ५:- लेकिन ऐसा कब तक चलेगा ?
कलाकार६:- हाँ ऐसा कब तक चलता रहेगा ? हम केवल गंगा मइया को ही प्रदूषित नहीं कर रहे, बल्कि जितनी
भी नदियाँ हैं हम सबको ही प्रदूषित कर रहे है। ज़रा सोचिये, जमना जी को प्रदूषित देख कर
भगवान कृष्ण क्या सोचते होंगे ? हो सकता है कभी राधा जी से पूछते भी हों के क्या ये वही जमुना
जी हैं जिनके तट पर बैठ कर हमने मुरली बजाई थी। गंगा के तटों पर लगे पेड़ों की अंधा धुंद कटाई
के कारण भू-क्षरण अर्थार्त सॉइल इरोज़न भी बढ़ गया है। गंगा के किनारे लगी टैक्सटाइल, लेदर,
रबर, प्लास्टिक आदि कारखानों ने गंगा मइया की हालत और दुखदायी कर दी है।
कलाकार ५:- सरकार कुछ करती क्यों नहीं ?
कलाकार६ :- हमारी सरकार ने इस पंच वर्षीय योजना में पूरे २०,००० करोड़ रुपय का प्रावधान किया है
ताकि गंगा मइया साफ हो सकें और हम सही मायने में कह सकें नमामि गंगे।
कलाकार ५:- लेकिन मइया केवल सरकारी प्रयासों से स्वच्छ नहीं होंगी। भक्तो की भी अपनी ज़िम्मेदारी है।
कलाकार ६:- बिलकुल। बिना जन भागीदारी के ये भागीरथी प्रयास सफल नहीं हो सकता।हम सब को देखना
है के गंगा मइया में ज़रा भी कचरा ना जाने पाए। मूर्तियों का जल विसर्जन करने के बजाए उनका
भू-विसर्जन करें। पानी का मोल करें और उसकी बर्बादी रोकें। सीवेज और कारखानों के गंदे पानी
को ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से परिष्कृत कर के ही वापस गंगा में जाने दें।
कलाकार ५;- बिक्लुल ठीक कह रहे हो भइया। तो सभी मिल कर बोलो गंगा मइया की
कोरस :- जय
सभी नाचते गाते हैं।
कोरस :- बरसात में तुमसे मिले हम सजन हमसे मिले तुम बरसात में तक धिना धिन बरसात में।
सभी बैठते हैं। ढोल की गंभीर थाप पर कलाकार ७ उठता है और हैण्ड पम्प बन जाता है। दूसरा कलाकार उठता है और जा कर हैण्ड पम्प चलाता है। पम्प से पानी नहीं निकलता। वो हताश हो कर बैठ जाता है।
कलाकार ७:- (हताशा से) हे भगवान ये क्या दिन दिखा रहे हो ? ताल तलैया सब गायब हुई गए, कुआं एक्को
बचे नाहीं। एक ई हैण्ड पम्प का सहारा बचा राहे, ई हो धोखा दई गा।
हैण्ड पम्प उसको चपत लगाता है लेकिन वो देख नहीं पाता के चपत किसने लगाई
कलाकार ७ :- (उठ कर इधर उधर देखता है ) ए कउन है? कउन मारिस हमका ? (किसी को ना पाकर बैठ जाता
है) ससुर समय ही गलत चल रहा है। उधर सूर्य नारायण आग बरसा रहे हैं, इधर मारे प्यास के
हलक सूखा जात है, इधर ई हैण्ड पम्प पानी भी नहीं उगल रहा है। (हैण्ड पम्प फिर उसको मारता
है। वो घबड़ा कर इधर उधर देखता है) ए कौन है ? हिम्मत है तो सामने आओ ! फिर देखो कैसा
तोड़ता हूँ तुमको। है हिम्मत सामने आने की ? नहीं है ना ? बस अब मत मारना। (फिर बैठता
है ) अब के मारा तो यही हैण्ड पम्प उखाड़ कर मारूंगा।
हैण्ड पम्प :- उखाड़ पाओगे ?
कलाकार७:- (इधर उधर देखते हुए) कौन बोला ?
हैण्ड पम्प :- मैं
कलाकार ७:- मैं कौन ?
हैण्ड पम्प :- मैं मतलब मैं।
कलाकार-७: (रुआंसा हो कर) अरे कौन हो भाई ? क्यों मुझे सता रहे हो ? क्या बिगाड़ा है मैंने तुम्हारा ?
हैण्ड पम्प :- तुम्ही ने तो सब कुछ बिगाड़ा है
कलाकार ७:- मैंने ?
हैण्ड पम्प :- हाँ तुमने और तुम्हारे इंसानी साथियों ने।
कलाकार ७:- (हैरत से ) इंसानी साथियों ने ? तो तुम क्या भूत हो ?
हैण्ड पम्प :- फिलहाल तो वर्तमान हूँ। लेकिन जल्द ही भूत हो जाऊंगा, अगर तुम लोग जल्दी ना सुधरे तो।
कलाकार ७ :- तुम हो कौन ? और मेरे सामने क्यों नहीं आ रहे हो ?
हैण्ड पम्प :- मैं तो तुम्हारे सामने ही हूँ।
कलाकार७:- कहाँ हो? कौन हो?
हैण्ड पम्प :- यहीं हूँ और मैं हूँ हैण्ड पम्प
कलाकार७:- (हैण्ड पम्प की ओर घूम कर और उसकी ओर देख कर) क्या हैण्ड पम्प ? ये तुम मुझसे बात
कर रहे हो ? (थूक गटकता है )
हैण्ड पम्प :- हाँ तुमसे और तुम्हारी समस्त मानव जाती से जो मेरे अस्तित्व को मिटाने पर तुली है।
कलाकार ७:- तुम तो कितनो की प्यास मिटाते हो। तुम्हे कोई क्यों मिटाएगा ?
हैण्ड पम्प :- ये ही तो दुःख की बात है के मुझे वोही लोग मिटा रहे हैं जिनकी मैं प्यास बुझाता हूँ। ये ही इंसान
की फितरत है के जिस डाल पर बैठता है उसी को काटता है।
कलाकार७:- लेकिन इंसान कैसे तुम्हारे अस्तित्व को मिटा रहा है ?
हैण्ड पम्प :- ये बताओ, मेरा तुम्हारा सब का अस्तित्व किस से है ?
कलाकार ७:- किस से ?
हैण्ड पम्प :- पानी से। मेरा अस्तित्व तो ख़ास तौर पर भू जल अर्थार्त ज़मीन के नीचे के पानी पर निर्भर करता
है। और तुम लोग उसी पानी को खत्म करे दे रहे हो।
कलाकार७ :- कैसे ?
हैण्ड पम्प :- पानी का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन कर के और पानी को बर्बाद कर के। बढ़ती हुई आबादी के साथ
इंसानो ने जंगलों और पेड़ो को काटना शुरू कर दिया जिसके कारण ग्लोबल वार्मिंग होने लगी
फ़लस्वरूप क्लाइमेट और नैचुरल साईकिल में फर्क पड़ने लगा। हर साल गर्मियों में लगातार
टेम्प्रेचर बढ़ने लगा और सर्दियों मं वही टेम्प्रेचर लगातार घटने लगा। इसके कारण हर साल
बारिश का भी प्रतिशत घटने लगा। जिसकी वजह से वाटर टेबल नीचे जाने लगा । तुमने भू जल
का दोहन तो बहुत किया लेकिन उसकी पुन: पूर्ती का कोई इंतज़ाम नहीं किया। पहले ताल
तलैया, पोखर आदि होते थे जिनके माध्यम से पानी रिस रिस कर धरती के अंदर पहुंचता
था। तुमने उन ताल तलैयों पर भी ऊँची ऊँची बिल्डिंगे बाँध कर उनके अस्तित्व को खत्म कर
दिया। इस लिए धीरे धीरे भू जल भी खत्म हो रहा है। एक समय ऐसा भी आएगा के पीने के
लिए एक बूँद पानी को तरस जाओगे। अगर अभी भी स्थिति को नहीं संभाला तो याद रखो,
अगला विश्व युद्ध अर्थार्त वर्ल्ड वॉर धन दौलत या ज़मीन के लिए नहीं, पीने योग्य पानी के
लिए होगी।
कलाकार७:- ओह! कितनी भयानक स्थिति होगी वो।
हैण्ड पम्प :- हाँ। भाई भाई के पानी का प्यासा हो जायेगा। एक एक बूंद पानी के लिए अपराध होने लगेंगे।
अभी समाचार पत्रों में पढ़ते हो ना के दो बाइक सवारों ने महिला से चेन लूटी।
कलाकार७:- हाँ।
हैण्ड पम्प :- फिर अख़बारों में पढोगे "दो बाइक सवारों ने महिला से पानी की बोतल लूटी" खून सस्ता और पानी
महंगा हो जायेगा। सेंसेक्स में पानी का भाव आएगा। टीवी पर देखो कैसे विज्ञापन आएंगे
दो कलाकार टीवी का मॉडल बन जाते है। दो अभिनय करते है।
सारे कलाकार मिल कर अपने मुँह से शादी में बजने वाली शहनाई की धुन निकालते है
अभिनेता :- बारात ठीक आठ बजे पहुंच जाएगी। लेकिन एक बात हम आपको बताना तो भूल ही
गए।
(सारे कलाकार मिल कर अपने मुँह से दुखी शहनाई की धुन निकलते है। दूसरे अभिनेता
के चेहरे पर घबड़ाहट के भाव आ जाते हैं।
अभिनेता:- घबड़ाइये नहीं। हमें कुछ नहीं चाहिए। हम चाहते है के बारातियों का स्वागत एक एक गिलास
पानी से किया जाये।
अभिनेता २:- (खुशी से) पानी गिलास।
कोरस :- (सभी गाते हैं ) पानी गिलास सभी को चाहिए पानी गिलास
हैण्ड पम्प :- और नेताओं के भाषण भी सुन लो
अभिनेता :- (नेता की मुद्रा में) मित्रों। ये सरकार गरीबों की सरकार है। इस सरकार ने गरीबों के लिए पानी का
कोटा बढ़ा दिया है। अब से हर गरीब भाई को प्रति माह दस दस बूंद पानी अतिरिक्त दिया जायेगा।
ये दस बूंदे आपको पहले से मिल रही २५ बूंदो के साथ ही राशन की दुकानों पर मिलेगा। यानी
सरकार आपको अब २५ की जगह ३५ पानी की बूंदे देगी जो की आपको आधार कार्ड के साथ
साथ स्मार्ट वाटर कार्ड दिखने पर मिलेंगी।
हैण्ड पम्प:- स्टॉक एक्सचेंज से ले कर बुलियन, कमोडिटी आदि हर मार्किट पाने के भाव से ही संचालित होगी।
कलाकार७:- मतलब हमें युद्ध स्तर पर पानी बचाना चाहिए ?
हैण्ड पम्प :- पानी तो बचाना पड़ेगा ही। लेकिन सिर्फ पानी बचाने से काम नहीं चलेगा।
कलाकार७:- फिर?
हैण्ड पम्प:- हमें जल स्रोतों को भी बचाना होगा।
कलाकार७:- कैसे ?
हैण्ड पम्प :- सबसे पहले हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए।
कलाकार१ :- पेड़ वाष्पीकरण में मदद करते है जिससे वर्षा होती है तथा भूमि में नमी बनी रहती है।
कलाकार २:- अगर प्रत्येक घर की छत पर ` वर्षा जल´ का भंडार करने के लिए एक या दो टंकी बनाई जाएँ और
इन्हें मजबूत जाली या फिल्टर कपड़े से ढ़क दिया जाए तो हर नगर में `जल संरक्षण´ किया जा
सकेगा।
कलाकार३:- गाँवों, कस्बों और नगरों की सीमा पर या कहीं नीची सतह पर तालाब बनाए जाएं , जिनमें
स्वाभाविक रूप में मानसून की वर्षा का जल एकत्रित हो। साथ ही, अनुपयोगी जल भी तालाब में
जाये , जिसे मछलियाँ और मेंढक आदि साफ करते रहते हैं और तालाबों का जल पूरे गाँव के पीने,
नहाने और पशुओं आदि के काम में आ सकता है ।
कलाकार ४:- बड़ीबड़ी बिल्डिंगों में वाटर हार्वेस्टिंग को कड़ाई से लागू किया जाये।
कलाकार ५:- विज्ञान की मदद से आज समुद्र के खारे जल को पीने योग्य बनाया जा रहा है, गुजरात के द्वारिका
आदि नगरों में प्रत्येक घर में `पेयजल´ के साथ-साथ घरेलू कार्यों के लिए `खारेजल´ का प्रयोग
करके शुद्ध जल का संरक्षण किया जा रहा है, इसे बढ़ाया जाए।
कलाकार ६;- याद रखिये। जल ही जीवन है
कलाकार १:- जल है तो कल है
कलाकार २:- पानी की समस्या है विकराल। जल बचाव की बनें मिसाल।
कलाकार ३:- जल संरक्षण जीवन का रक्षण।
कलाकार ४:- हम सब मिलकर अभियान चलाएं (सब एक दूसरे का हाथ पकड़ते हैं)
सब :- जीवन हेतु जल बचाएं।
कलाकार ५:- तो फिर .....
कोरस :- घनन-घनन घिर-घिर आये बदरा। (सब नाचते हैं )
अद्भुत
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