भयानक आंधी तूफान। बिजली यों चमक रही है मानों सारी कायनात को भस्म कर देगी। धीरे धीरे तूफान की आवाज़ मन्द पड़ती है और रूहानी
संगीत उभरता है। जिब्राइल जो अँधेरे में मूर्ती
की तरह खड़ा था अब धीरे धीरे मंच के मध्य में आ कर खड़ा होता है।
जिब्राइल :- मैं हूँ जिब्राइल।
खुदा का दूत। मैं हमेशा से खुदा को समर्पित रहा इसी
लिए जिब्राइल
कहलाया। दरअसल हीब्रू जबान में मेरे नाम
का मतलब ही है 'खुदा को समर्पित। वो
मैं ही
था जिसने बादशाह नबुकनज़र के ख्वाबों की
व्याख्या करने में नबी दानियाल की मदद करी
थी। मैं ही ज़करियाह और माता मरियम के पास
शुभ सन्देश ले कर गया था। हज़रत लूक
अपनी इन्जील-ए-मुक़द्दस में मुझे खुदा का
फरिश्ता कह कर सम्बोधित करते हैं। लेकिन
मैं खुदा का प्रधान दूत नहीं। आप सब सोच
रहे होंगे के आज मैं आप से मुखातिब क्यों हूँ?
तो पहले सोचिये के आप सब यहां क्यों हैं? आप सब यहाँ इसलिए हैं क्यों के आप सब खुदा
के चुने हुए हैं।
ये खुदा की मर्ज़ी है के आज मैं आप से मुखातिब होऊं और
आप को उसके
बारे में बताऊं जिसके बारे में आप बहुत कम
जानते हैं। जी हाँ ठीक समझे आप। आज
मैं आपको बताऊंगा अपने प्रभू की माता के
बारे में। माता मरियम के के बारे में। बात शुरू
होती है ख़ुदावन्द येशू के जन्म से कोइ १६ साल पहले, जब रूम पर आगस्टस कैसर की
हुकूमत थी। उस वक्त हेरोडियस रोमन राज्य-सभा की मदद से यहूदा का राजा बन बैठा
और उसे मार्क एंटोनी ने टेट्रोक के की उपाधी से
नवाज़ा। टेट्रोक यानी राजा का प्रतिनिधी।
हेरोडियस के ज़ुल्म-ओ-सितम से त्रस्त यहूदा की जनता
बड़ी ही बेसब्री से अपने मसीहा के
आने का इंतज़ार कर रही थी, तो दूसरी तरफ हेरोडियस
प्रभू येशु मसीह के जन्म के ख्वाब से
बेहद परेशान था। उसे डर था के राजाओं के राजा की
पैदाइश के बाद उसका तख्तो-ताज छिन
जायेगा। लेकिन लोग मसीहा के आने की उम्मीद गलत जगह
लगाए हुवे बैठे थे। उन्हें यकीन था
के उनके तारनहार की पैदाइश योखेम जिन्हें इमरान भी
कहा गया है, के घर में होगी। जब
योखेम की पत्नी हैना एक नई ज़िन्दगी को जन्म देने वाली
थी तो एक तरफ यहूदा के लोग
योखेम के घर के बाहर भीड़ लगाए अपने मसीहा के जन्म
लेने का इंतज़ार कर रहे थे, दूसरी
तरफ परेशां हाल हेरोडियस अपनी महासभा में आने वाली
मुसीबत से छुटकारा पाने की जुगत
भिड़ा रहा था। लेकिन खुदा को
तो कुछ और ही मंज़ूर था। योखेम के घर बेटी हो
गई।
द्र्श्य १
हेरोडियस का दरबार
हेरोडियस :- याद रखो, अगर मेरा तख्तो ताज खतरे में है तो तुम सब का ऐशो-आराम भी खतरे में है। अगर
मेरा ताज उछाला गया तो, तो तुम सब की
ज़िंदगियाँ भी हलाक कर दी जाएंगी। ये ऐय्याशी
भरी ज़िन्दगी जो तुम सब जी रहे हो ये मेरी बदौलत है।
अगर मैं नहीं रहा तो तुम सब भी नहीं
रहोगे। एक हमला औरत तक को खत्म नहीं कर सके तुम लोग
तो और क्या कर सकते हो?
सैनिक १ :- हुज़ूर, योखेम के घर को पूरी यहूदिया ने घेर रखा है। सब लोग आने वाले मसीहा के
दर्शन के लिए
उतावले हैं। इतने लोगों के बीच हन्ना की जान लेना
ना-मुमकिन है। सब मरने मारने पर उतारू
हो जायेंगे।
हेरोडियस :- यहूदा के लोगों में इतना दम
के वो हेरोडियस की फौज का मुकाबला करें? सच क्यों नहीं
कहते
के तुम सब खा खा कर भैंसे हो गए हो ! इन दबे कुचले
लोगों को संम्भालना अब तुम्हारे बस
की बात नहीं।
सैनिक २ :- अब यहूदिया के लोग दबे कुचले
नहीं रहे। अपने मसीहा के आने की उम्मीद ने इन्हें जोशो-खरोश
से भर दिया है। अगर हमने उनपर हमला किया तो वो
वहशीयाना तरीके से लड़ने को तैयार
हो जायेंगे।
हेरोडियस :- तो लड़ो। कुचल डालो हर उस सर
को जो मेरी हुकूमत के सामने उठने की हिमाकत करे।
सैनिक १:- कितने सर कुचलेंगे? एक सर गिरेगा तो दूसरा उठ खड़ा होगा।
हेरोडियस :- वाह! बहुत खूब! महान हेरोडियस
की सेना आज आम आदमी की ताक़त से डर रही है।
सैनिक २:- इतिहास गवाह है हुजूर, जब भी ख़ाक नशीं उठता है तो तख्त गिर जाते हैं और ताज उछाले जाते
हैं।
हेरोडियस :- ये धमकी तुम मुझे दे रहे हो? मुझे? हेरोडियस को? उस हेरोडियस को जिसे रूमी सल्तनत ने
टेट्रोक की उपाधी से नवाज़ा है ?
सैनिक १:- रोमन सल्तनत ? तो फिर रोमन सल्तनत के ये सिपाही ही कुछ क्यों नहीं करते ?
रोमन सिपाही :- जनाब-ए-हेरोडियस, आपके और ऑगस्टस कैसर के बीच हुई सन्धि के अनुसार हम रोमन
सिपाहियों को यहूदिया
के धार्मिक मामलात में दखल देने की इजाज़त बिलकुल भी
भी नहीं है।
हेरोडियस :- ये धार्मिक मामला नहीं है।
ये पूरा राजनीतिक मामला है।
रोमन सिपाही : कैसे?
हेरोडियस : वो राजाओं का राजा होगा, वो मेरा तख्तो-ताज छीनने आ रहा है।
रोमन सिपाही :- कौन ?
हेरोडियस :- मसीहा
रोमन सिपाही:- कहां है?
हेरोडियस :- योखेम के घर पैदा होने वाला
है
रोमन सिपाही :- कैसे पता?
हेरोडियस :- नबियों नें भविष्यवाणी की है।
रोमन सिपाही :- नबियों की भविष्यवाणी एक
धार्मिक मामला है
हेरोडियस :- (व्यंग्य से) और तुम रोमन सिपाहियों
को यहूदिया के धार्मिक मामलात में दखल देने की
इजाज़त बिलकुल भी नहीं है।
रोमन सिपाही :- जी नहीं।
हेरोडियस :-लेकिन याद रखो। जो आ रहा है वो
सारी दुनिया का राजा होगा। सिर्फ मेरी ही नहीं तुम सब की
की सत्ता जाएगी। जो रोम आज अपनी ताकत पर
इतना इतरा रहा है, कल कोई उसका नाम
लेने वाला नहीं बचेगा। फिर क्या करोगे ?
रोमन सिपाही :- हम उस मसीहा के आगे सज़दा
कर लेंगे।
हेरोडियस :- शर्म आनी चाहिये ऐसी बातें
करते हुवे।
रोमन सिपाही :- शर्म कैसी ? हम तो सिपाही हैं। हमें इससे मतलब नहीं
के बादशाह कौन है। जो भी बादशाह
गद्दी पर होता है हम उसी की तरफ से लड़ने चले जाते
हैं। कहने को तो रोम में लोकशाही
है, लेकिन होता क्या है? हमेशा गृह युद्ध ! जो सैनिक कभी पौम्पेई की तरफ से लड़ते थे वोही
सैनिक उसके
बेटों के खिलाफ उसके दुश्मन, जूलियस सीज़र की तरफ से लड़े । होता क्या है ?
खून खराबा, कत्लो-गारत। अगर आनेवाला वाकई राजाओं का राजा हुवा तो पूरी दुनिया में अकेली
उसकी हुकूमत होगी। कोई खून खराबा नहीं होगा। चारों तरफ अम्न-ओ-शांती होगी। ऐसे राजा
खून खराबा, कत्लो-गारत। अगर आनेवाला वाकई राजाओं का राजा हुवा तो पूरी दुनिया में अकेली
उसकी हुकूमत होगी। कोई खून खराबा नहीं होगा। चारों तरफ अम्न-ओ-शांती होगी। ऐसे राजा
के आगे कौन नहीं सजदा
करेगा।
हेरोडियस :- तुम्हारी बातों में रोमन
सल्तनत के खिलाफ बगावत की बू आ रही है।
रोमन सैनिक :- ये काल्पनिक बगावत तुम्हारे
वास्तविक डर से बड़ी नहीं।
हेरोडियस :- नहीं डरता मैं।
नहीं डरता किसी से मैं।
मत भूलो, मैं हेरोडियस
हूँ, हेरोडियस। अगर उसे ताकत
से नहीं खत्म कर सका तो हिकमत से खत्म
करूंगा।
रोमन सैनिक :- क्या हिकमत करोगे? छोटे छोटे बच्चों के कत्ल का हुक्म दे दोगे।
हेरोडियस :- हाँ, अगर जरूरत पड़ी तो वो भी करूँगा। खत्म कर दूंगा सारे नवजात बच्चों को
अय्यार का बोलते हुवे
प्रवेश : आपको कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं।
हेरोडियस :- आओ अय्यार, क्या खबर लाये हो?
अय्यार :- अच्छी खबर लाया हूँ जहाँपनाह।
ब्च्चा पैदा हो गया है, और वो एक लड़की है।
हेरोडियस :- (खुशी से चहकते हुवे) झूठ!
झूठ है सब ! नबियों की पेशीनगोई झूठ है। कोई राजाओं का
राजा
नहीं पैदा हो रहा। (अय्यार से) योखेम के
घर क्या पैदा हुवा है?
अय्यार :- लड़की।
हेरोडियस :- (पहले सिपाही से) क्या पैदा
हुवा है ?
सिपाही १:- लड़की
हेरोडियस :- (दूसरे सिपाही से) क्या पैदा हुवा है?
सिपाही २:- लड़की
हेरोडियस :- (रोमन सिपाही से) सुना तुमने? क्या पैदा हुवा है? लड़की।
सभी हंसते हैं
हेरोडियस :- इसलिए अब तुम लोग भी बच गए
हो। तुम लोग सब खुश किस्मत हो।
किस्मत ने तुम लोगों
का साथ दिया है। मैं जाता हूँ अपनी आराम गाह। तुम लोग
भी खुशियां मनाओ। अब ये मत
सोच लेना के मेरी गद्दी कोइ लड़की छीनेगी।
सब हंसते हैं। हेरोडियस बाहर
निकल जाता है
सिपाही १:- मसीहा नाम के शोर शराबे का
क्या हुवा?
सिपाही २:- फुस्स्सस्स
सिपाही १:- अब जनाबे ज़करियाह पूरी यहूदी
कौम को क्या जवाब देंगे?
अय्यार :- लड़की की पैदाइश हर यहूदी घराने
के लिए बदनामी और परेशानी का सबब होती है।
सिपाही २:- लड़की पैदा हुई, वो भी इस बुढ़ापे में !
सिपाही १:- जब गोद भरने की उम्र काफी पीछे
छूट गई हो।
रोमन सिपाही :- क्या ये चमत्कार नहीं है।
अय्यार:- हाँ है चमत्कार।
सिपाही २ :- अरे भाई तुम तो अय्यार हो, याने के जासूस। तुम्हे तो हर चीज़ की
खबर होती है।
सिपाही १:- तो बताओ के हना जो बाँझ कहलाती
थी उसकी गोद इस बुढ़ापे में कैसे हरी हो गई ?
अय्यार :- ये तो हम सभी जानते है के योखेम
और हना दोनों ही दाऊद के घराने से हैं। हना ज़िन्दगी भर सिर्फ
इस लिए प्रताड़ित रही के वो मां नही बन पाई।
सिपाही २:- हाँ। सुलेमान के गिरजे में
जिसे हैकल भी कहते हैं, वहां उनकी कभी कोइ
भेंट नहीं स्वीकार की
जाती थी क्यों के हना बाँझ थी।
रोमन सिपाही :-
मैंने भी सुना है के हैकल के पादरियों का ये मानना था
के हना का बांझपन, उनपर खुदा
की लानत है।
अय्यार : हाँ, ठीक सुना है। इसी लिए जनाब योखेम ने रेगिस्तान में जा कर चालीस दिनों का
रोज़ा रखा। वहां
एक फरिश्ते ने हाज़िर हो कर उन्हें सन्तान प्राप्ती का वचन दिया।
सिपाही १:- और ये यहूदी मान्यता है के
बुढ़ापे की सन्तान बड़े काम करती है।
रोमन सिपाही :- शायद इसी वजह से ज़करियाह
ने पेशनगोई कर दी के मसीहा की पैदाइश हना की कोख से
होगी।
सिपाही १:- और हो गई लड़की।
सिपाही २:- क्या करेंगे ज़करियाह इस ज़िल्लत
और रुसवाई का ?
सिपाही १:- कुछ नहीं।
वो घर से बाहर तब तक नहीं निकलेंगे जब तक दुनिया इस
जिल्लत को भूल नहीं
जाती। सालों तक वो गलीली की सड़कों पर दिखाई नहीं
देंगे, ताकी लोग इस काण्ड को भूल जाएँ।
रोमन सिपाही : तो क्या जनाब ज़कर्याह खुदा
की इस मर्ज़ी पर एतराज़ करेंगे?
अय्यार :- नहीं कभी नहीं।
सिपाही २:- तो लोगों को वो क्या जवाब
देंगे?
अय्यार :- कुछ भी
हो, जनाब ज़करियाह एक नबी
ही नहीं, यहूदी गिरजे के पादरी भी हैं।
खुदा पर उनका
अक़ीदा बहुत ही दृढ़ है।
वो गिरजे की अपनी ज़िम्मेदारियों के प्रति हमेशा सजग
रहते हैं। उनसे
ये उम्मीद करना के वे खुदा के फैसले पर
ऐतराज़ करें या घर के भीतर रह गिरजे के प्रति अपनी
ज़िम्मेदारी से मुंह मोड़े, बेकार की उम्मीद है।
सिपाही १ :- उससे भी बड़ा मसला एक और है।
सिपाही २ :- हना की मन्नत का ?
रोमन सिपाही :- हना की मन्नत ?
सिपाही २:- हां हना की मन्नत का।
हना ने मन्नत मानी थी के वो अपनी
औलाद को खुदा की राह में नज़र
कर देगी। अब इबादतगाह के पादरी किसी लड़की
को तो कबूल करेंगे नहीं।
रोमन सिपाही :- क्यों नहीं कबूल करेंगे।
सिपाही १:- अरे तुम हो रोमन सिपाही।
तुम्हें यहूदी रीति रिवाज़ का पता नहीं है। लड़कियों का गिरजे में
खिदमत करना वर्जित है
रोमन सिपाही :- ओह!
एक और सिपाही का
प्रवेश
सिपाही ३ :- अरे कुछ सुना तुम लोगों ने?
सिपाही १:- फिर कोइ बासी खबर लाये होगे।
सिपाही ३:- बासी नहीं एक दम तरो-ताजा।
सिपाही २:- यही ना के हना के लड़की हुई है।
सिपाही ३:- नहीं
सिपाही १:- तो ?
सिपाही ३ :- क्यों बताऊँ ? मैं तो बासी खबर लाता हूँ।
सिपाही २:- अरे नहीं भाई, तुम तो एक-दम तरो-ताज़ा खबर लाते हो।
सिपाही १:- बिलकुल चूल्हे से उतरी।
सिपाही ३:- जो खबर मैं लाया हूँ वो बिलकुल
चूल्हे से उतरी जितनी ताज़ा है
अय्यार :- और वो खबर क्या है ?
सिपाही ३:- यही के हना ने अपनी बेटी का
नामकरण भी कर दिया है।
अय्यार :- क्या नाम रखा है उसने अपनी बेटी का ?
सिपाही ३:- मरियम।
सिपाही १ :- (हैरत से) मरियम ?
सिपाही ३ :- हाँ
सिपाही २ :- अरे ये नाम तो नबी मूसा की बहन का
सिपाही १ :- क्या मतलब है इस नाम का ?
सिपाही ३ :- मरियम नाम का मतलब है, 'खुदा की चहेती'
सिपाही १ :- (हैरत से) मरियम ?
सिपाही ३ :- हाँ
सिपाही २ :- अरे ये नाम तो नबी मूसा की बहन का
सिपाही १ :- क्या मतलब है इस नाम का ?
सिपाही ३ :- मरियम नाम का मतलब है, 'खुदा की चहेती'
fade out
जिब्राइल :- धीरे धीरे वक़्त गुज़रता गया।
मरियम अब तीन साल की हो चुकी थी। वो दिन रात गलीली
के पहाड़ों को निहारा करती थी और सोचा करती
थी के कब वो उन पहाड़ों को पार कर यरुशलम
पहुंचेगी और कब वो खुदा के खिदमतगारों में
शामिल होगी। कभी कभी वो ये सोच कर परेशान भी
हो जाती के पता नहीं खुदा उसे वहां क़ुबूल करेगा भी या
नहीं। उसको सुलेमान के गिरजे में क़ुबूल
करवाने का ज़िम्मा उठाया नबी जकरयाह ने।
जब नबी ज़करिया ने मरियम को खुदा के
खिदमतगारों में शामिल
करने का मसला फरीसियों की सभा में उठाया तो वहां भूचाल आ गया।
दृश्य २
फरीसियों की सभा
फरीसी १ :- ये ना-मुमकिन है। अब तक कभी भी
ऐसा नहीं हुवा है के एक लड़की गिरजे में जा कर खिदमत
करे। आज तक एक औरत भी इस मुक़द्दस जगह में दाखिल नहीं
हो सकी है।
फरीसी २ :- सही है जनाब।
लेकिन आप अच्छी तरह जानते हैं के बच्चों को गिरजे में
खिदमत के लिए रखना
एक अच्छी रवायत है जो सालों साल से चली आ रही है। बच्चे पूरे बारह साल तक गिरजे में रह
कर खिदमत करते हैं और साथ ही साथ पढाई भी करते हैं।
कर खिदमत करते हैं और साथ ही साथ पढाई भी करते हैं।
फरीसी ३:- लेकिन मत भूलें के बच्चियों और
औरतो का गिरजे में प्रवेश वर्जित है।
फरीसी ४:- औरतों और बच्चियों का गिरजे में
जाना हराम है।
फरीसी १:- जनाबे जकरियाह ने हमेशा लड़कियों
को लड़कों से अलग रखने पर ज़ोर दिया है।
ज़करियाह :- लेकिन मरियम कोइ आम लड़की नहीं
है
फरीसी ३ : अच्छा! मरियम में ऐसा क्या है
जो उसको ख़ास बनाता है?
ज़करिया :- उसकी मां !
फरीसी २:- (हैरत से) उसकी माँ ?
फरीसी ४:- वो कैसे ?
ज़करिया :- सालों साल एक अदद औलाद को तरसती
हना अपने बुढ़ापे की औलाद को महज तीन साल की
उम्र में पूरे बारह सालों के लिए खुदा को नज़र कर रही
है। कौन माँ ऐसा कर सकती है ? हना तो
ये भी नहीं जानती के अगले बारह सालों तक
वो ज़िंदा भी रहेगी या नहीं। वो दोबारा कभी अपनी
बेटी से मिल पायेगी भी या नहीं ? फिर भी वो ऐसा कर रही है। क्यों ? क्यों की वो
खुदा के प्रति
दूसरी माओं से ज़्यादा आस्थावान है। वो
अन्य माओं की तरह अपनी औलाद को सीने से चिपका
के रखने के बजाए, ईश्वर से बांधी अपनी
वाचा पूरी कर रही है।
मुख्य फरीसी :- हूँ। बात में तो दम है।
लेकिन इस गिरजे के क़ानून का क्या होगा ?
ज़करिया :- इसका भी एक हल है। इसके लिए भी
एक कानून बनाना होगा जो दीगर पादरियों और खादिमों
से बिलकुल ही अलग होगा।
फरीसी ४ :- (क्रोध से) ओ मेरे मालिक ! एक लड़की गिरजा-इ-सुलेमान में !
ज़किरयाह :- मैं अपने कमरे के ऊपर ही एक और
कमरा बनवा दूंगा मरियम के लिए ताकि मैं उसकी
सरपरस्ती कर सकूं।
फरीसी ३:- तुम बगैर किसी इजाज़त के इस
इबादतगाह में तब्दीली लाना चाहते हो
मिखाइल:- मैं इस इबादतगाह का उस्ताद हूँ
और मरियम मेरी शागिर्द होगी। मेरे कमरे के साथ ही
एक कमरा
खाली है। मरियम के रहने का वहीं इंतज़ाम
किया जाये।
फरीसी २:- जनाबे-मिखाइल, मामला मरियम की सरपरस्ती का है, उसकी शागिर्दी
का नहीं।
फरीसी १ : मैं योखेम का भांजा हूँ। इसलिए
मरियम की सरपरस्ती का भी हक़ रखता हूँ।
फरीसी ३ :- फिजूल बहस मत करो। अगर मामला
खानदान का है तो मैं भी उसी खानदान का हूँ, मैं भी
मरियम की सरपरस्ती का हक रखता हूँ।
फरीसी २:- आप जानते हैं ? मरियम भी दीगर खुद्दाम की तरह मेरी सरपरस्ती में है।
मैं किसी और को उसकी
सरपरस्ती नही करने दूंगा।
मिखाइल :- नहीं।
ऐसा नहीं है के मरियम के सरपरस्त फक्त तुम हो। तमाम
बच्चे इसी इबादतगाह में मेरे
साथ पढ़ते हैं। अब ये लड़की सभी की राय से इस इबादतगाह
में लाई जा रही है तो ये मेरी
सरपरस्ती में रहेगी जब तक की इसकी तालीम मुकम्मल नहीं
हो जाती।
फरीसी १ :- तुम हद से ज़्यादा बात कर रहे
हो।
फरीसी ३ :- आप चिल्ला क्यों रहे हो। आप को
लगता है के सीख चिल्ला कर अपनी बात मनवा लोगे ?
मुख्य फरीसी :- झगड़ा मत करो। खामोश हो
जाओ। (प्यार से) देखो ये बात अहम नहीं है के कौन मरियम
की सरपरस्ती करे।
अहम ये है के किन वजूहात पर किसको उसकी सरपरस्ती
सौंपी जाए।
ज़करिया :- चार वजूहात के बिना पर मरियम की
सरपरस्ती मुझे मिलनी चाहिये। पहली बात ये, के उसने
मेरे घर पर परवरिश पायी। दूसरी ये, के वो मुझे बहुत चाहती है। तीसरी ये, के मरते वक्त उसकी
माँ ने उसे मेरे हवाले किया , चौथी ये.....
फरीसी १ :- चौथी ये के खुदा ने तुम्हें
कोई औलाद नहीं दी ?
जकरिया :- नहीं।
चौथी वजह ये है के मैं उस अनमोल मोती की कद्र और कीमत
दूसरे लोगों से ज़्यादा
जानता हूँ।
फरीसी १:- (हंसता है) पहली बात तो ये के
मरियम की मां ने उसे गिरजे के हवाले किया है। दूसरी ये, के जिस
चाहत का आपने ज़िक्र किया है, तो बच्चे बहुत जल्द भूल जाते हैं।
जकरिया :- दूसरी ये के वो मेरे साथ रहने
की आदी है।
मुख्य फरीसी :- मरियम की परवरिश को ले कर
झगड़ा ना करें। क्या आप लोगों को
यकीन नहीं है के
मरियम खुदा की पनाह में है ?
ज़करियाह :- हाँ ये सच है।
मुख्य फरीसी :- इबादतगाह के क़ानून के तहद, ऐसे मसाइल तय करने का मुंसिफ़ाना तरीका ये है के कुराह
अंदाज़ी की जाये। आप सब लोग अपनी अपनी कलम यहां जमा
करें। आप सब की कलम
एक साथ पानी में डाल दी जाएंगी। जिस किसी भी शख्स की
की कलम डूबेगी नहीं अलबत्ता
पानी में तैरती रहेगी, मरियम की
सरपरस्ती उसी को मिलेगी।
मुख्य फरीसी आदेशात्मक ताली बजाता है। दो खादिम अंदर
आते हैं। एक के
हाथ में पानी का कटोरा
है और दुसरे के हाथ में बड़ी सी प्लेट है। खादिम पानी
का कटोरा ले कर मुख्य फरीसी के पास खड़ा हो जाता है।
दूसरा प्लेट पर सबकी
कलम इकट्ठा कर मुख्य फरीसी के पास जाता है। मुख्य
फरीसी सारी कलम एक
साथ ले पानी में डाल देता है।
सब बड़े ध्यान से कटोरे में देखते हैं। सबसे पहले
मिखाइल की कलम डूबती
है। वो सर पर हाथ मार कर हताशा से उस जगह से थोड़ा
हट जाता है।
फिर फरीसी ३ की कलम डूबती
हैं। वह मिखाइल के पास जा कर
हताशा से खड़ा हो
जाता है।बाकी लोग ध्यान से कटोरे में होती हुई हरकतों
पर ध्यान लगाए रहते
हैं।
मिखाइल :- (फरीसी ३ से) कुछ भी हो जाये
मरियम की सरपरस्ती ज़करियाह को नहीं मिलनी चाहिये।
फरीसी ३:- क्या फर्क पड़ता है ?
मिखाइल :- पड़ता है फर्क। ये मसला मरियम की
सरपरस्ती का नहीं जीत और हार का है।
फरीसी २ की भी कलम डूब जाती है। वो भी उन्हीं के साथ
आ कर खड़ा हो जाता है।
फरीसी ३:- ठीक कहते हैं आप।
अगर ज़करिया जीत गया तो आम लोगों में उसकी इज़्ज़त बढ़
जाएगी।
फरीसी २ :- आप लोगों को कुराह अंदाज़ी के
लिए राज़ी ही नहीं होना चाहिये था।
मिखाइल :- तो आप ही को ऐतराज़ करना चाहिए
था।
फरीसी २ :- आप सब चुप थे तो मैं भी चुप
रहा।
मिखाइल :- अगर पहले से पता होता तो मैं
ढून्ढ कर हल्की कलम ले आता।
फरीसी १ की भी कलम डूब जाती है
फरीसी :- लेकिन ये तो बे-ईमानी होती।
मिखाइल :- जंग और प्यार में सब जायज़ है।
फरीसी ४ की भी कलम डूब जाती है
मुख्य फरीसी :- मुबारक हो जकरिया।
ख़ुदावन्द ने मरियम की सरपरस्ती का ज़िम्मेदार आप ही को
करार दिया है।
लाइट की
प्रोफाइल ज़करिया पर पड़ती है बाकी सब अँधेरे में। ज़करियाह के हाथ
शुक्रुज़ारी में उठते हैं।
Fade out
दृश्य ३
मंच के एक कोने में प्रकाश के गोले के बीच
मरियम प्रार्थना कर रही है
मरियम:- ऐ मेरे खुदा।
मैं मरियम हूँ। तेरी खिदमतगुज़ार। तू तो जानता है के
मेरा बाप अब इस हयात में
नहीं है। जल्द ही मैं अपनी मां से भी जुदा
हो जाउंगी ताकी तेरे भवन में जा कर तेरी खिदमत कर
सकूं। ऐ मेरे आसमानी बाप, अपनी इस खिदमतगुजार को ताकत अता कर, ताकी मां की
जुदाई
बर्दाश्त कर सकूं। और मेरी माँ को भी इस
जुदाई को बर्दाश्त करने की हौसला और हिम्मत अता
फरमाना मेरे पाक परवरदिगार। आमीन
fade out
दृश्य ४
जकरयाह का घर। हना एक कोने में खड़ी सुबक रही है।
ज़करियाह उसे हौसला दे रहा है।
ज़करिया :- अपने को सम्भालो हना और मरियम
को खुशी ख़ुशी विदा करो।
हना :- कैसे ? हना तो अपने दिल को सम्भाल लेगी, लेकिन एक मां
अपने को कैसे सम्भालेगी ?
ज़करिया :- अगर आज तुम कमज़ोर पड़ गई तो फिर
मरियम कभी जा नहीं पायेगी। फिर तुम्हारी
मन्नत का क्या होगा ?
हना :- कुछ दिन !
कुछ दिन और अपने कलेजे के टुकड़े को अपने पास रख लूँ।
ज़करियाह :- ये नहीं हो सकता।
हना :- क्यों नहीं हो सकता ? एक बच्ची कुछ दिन और अपनी मां के पास क्यों नहीं रह सकती ?
ज़कारियाः- क्यों के अब उससे जुदा होने का
वक्त आ गया है।
हना :- वक्त से क्यों नहीं कहते के थोड़ा
ठहर जाए।
ज़कारिया :- वक्त कभी किसी के लिए नहीं
ठहरता। सब को वक्त के साथ चलना पड़ता है।
हना :- कितना निर्मोही है ये वक्त !
ज़कारिया :- वक्त हमें सिखाता है के
दुनियावी चीजों से आसक्ती मत करो। मोह करो तो सिर्फ खुदा से।
खुदा ही इकलौती सच्चाई है, बाकी सब फानी है।
हना:- करती हूँ मुहब्बत उस खुदा से।
बे-शुमार मुहब्बत करती हूँ। इसी लिए तो अपनी
एकलौती औलाद
उसकी खिदमतगुज़ारी में नज़र कर दी।
ज़कारिया :- तो फिर अब क्यों पीछे हट रही
हो ?
हना :- पीछे कहां हट रही?
मैं तो बस अभी कुछ दिन और उसे अपनी छाती से लगा कर
रखना चाहती हूँ।
ज़कारिया :- उससे क्या फर्क पड़ जायेगा ?
हना :- ये ही तो मैं पूछ रहीं हूँ।
अगर कुछ दिन और मेरे साथ रह लेगी तो क्या फर्क पड़
जाएगा ?
ज़कारिया :- पड़ जायेगा। बहुत फर्क पड़
जायेगा।
हना :- क्या ?
ज़कारिया :- हना तुम जानती हो के मरियम
पहली लड़की है जो गिरजा-इ-सुलेमान में कदम रखने
जा रही है। इसके लिए गिरजे के कानून में
तब्दीली भी लानी पड़ी। तुम ये भी जानती
हो के बहुत से फरीसी इस तब्दीली के खिलाफ
थे। जानती हो या नहीं ?
हना :- जी। जानती हूँ।
ज़कारिया :- अगर वक्त रहते मरियम वहां नहीं
पहुंची, तो विरोधियों को मौका मिल जायेगा। हो सकता
है वो लोग मरियम की हैकल में आमद रोकने
में कामयाब हो जाएँ। (अंदर आवाज़ देता है)
एलीज़ाबेथ, मरियम को ले
आओ।
एलीज़ाबेथ मरियम को ले कर आती है।
मरियम की चाल में एक आत्मविश्वास है। ऐसा
लगता है उसे अपने इस निर्णय पर गर्व है।
वो अपनी अपनी मां की तरफ देखती भी नहीं
है। आ कर ज़करिया का हाथ पकड़ लेती है।
मरियम :- चलें ?
ज़करिया :- हाँ चलो।
दोनों निकल जाते है।
हना :-(रोती है) मरियम मेरी बच्ची मेरी बच्ची । (एलिज़ाबेथ से चिपक जाती है)
Fade Out
दृश्य ५
फरीसियों की सभा
फरीसी १:- बाजार में हुवे हर लेनदेन में
हमें कुल तीन सोने के सिक्के मिलते हैं, जिसमें से एक
सिक्का हम फरीसियों
की जेब में जाता है, दूसरा हैकल के रख
रखाव में और तीसरा सिक्का
हेरोडियस को कर के रूप में दे दिया जाता है।
फरीसी २:- लेकिन अब हेरोडियस के सिपाही आ
कर ज़्यादा कर की मांग करने लगे हैं।
फरीसी ३:- हेरोडियस को कर बढ़ा कर देना
ही पड़ेगा, वरना मुसीबत
हो जाएगी।
फरीसी १ :- उसके लिए हमें कर की राशी
बढ़ानी पड़ेगी।
फरीसी ४:- कर की राशी में इजाफा ? ये तो लोगों पर ज़्यादती होगी।
फरीसी २ :- अफरा-तफरी पैदा हो जाएगी।
फरीसी ४:- लोग तो वैसे ही काफी मुश्किलात
में ज़िन्दगी बसर कर रहें हैं, उनकी परेशानियां और
बढ़ जाएंगी।
फरीसी २:- और इस सूरत में वो बगावत
करेंगे।
फरीसी १ :- कब से ? कब से आप को लोगों की मुश्किलों की इतनी फिक्र होने लगी है ?
फरीसी ४ :- अगर लोगों की परेशानियां बढ़ेगी
तो मुल्क में अपराध बढ़ेंगे। मुलाजिमों में रिश्वतखोरी
बढ़ेगी।
फरीसी ३:- रिश्वत खोरी यरुशलम में ? ना-मुमकिन !
फरीसी २:- आपको कुछ खबर भी है के यरुशलम
में कितनी रिश्वतखोरी बढ़ चुकी है ?
फरीसी ४:- अभी कल ही सुई के नाके पर....
फरीसी ३:- क्या हुवा सुई के नाके पर ?
फरीसी ४:- सुई के नाके पर, जहां ऊंटों की आमद-रफ्त मना है, वहां के
चौकीदार ने एक विदेशी व्यापारी
से रिश्वत ले कर उसके ऊंट को गुज़र जाने दिया।
फरीसी ३:- क्या सुई के नाके से ऊंट गुज़र
गया?
फरीसी २:- हाँ
फरीसी ३:- लेकिन ये समस्या तो हेरोडियस की
है, हमारी नहीं। कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है, हम
पादरियों का नहीं।
फरीसी २:- लेकिन लोगों को सही रास्ता
दिखाना हम पादरियों का काम है। हमें चाहिये के हम कोइ ऐसा
काम न करें जिससे लोग पाप के रास्ते पर चलने पर मजबूर
हों।
फरीसी १:- (जो काफी देर से अपने सर को दबा रहा था जैसे के सर में बहुत दर्द हो) आह !
फरीसी ३:- क्या हुवा जनाब जोसिफस ? हम आपको नाराज़ नहीं करना चाह्ते थे।
फरीसी १:- नहीं ये आप की वजह से नहीं। है
फरीसी २ ;- इन्हें ये
तकलीफ कई सालों से है।
फरीसी १ :- मुझे माफ कर दीजिये। मेरी वजह
से इस सभा में खलल पड़ गया। इस दर्द की वजह से मैं काफी
कमज़ोर महसूस करने लगा हूँ।
फरीसी ४:- लोग कहते हैं के मरियम के हाथों
में शिफा है। आप मरियम के पास क्यों नहीं जाते हैं। वो
लोगों को चंगा कर देती है।
फरीसी २:- बकवास। चंगाई की ताक़त करिश्माई
लोगों में होती है जो खुदा के चुने हुवे होते है।
फरीसी ४ :- हां मरियम करिश्माई ही है।
याद करिये, आज से करीब तीन एक बरस पहले, जिस दिन मरियम
इस हैकल में आई थी। उसे देखते ही हमारे मुख्य-फरीसी ने उसके माथे को चूमा और आशीष दी
और कहा के 'हे मरियम, धन्य है तू। प्रभू तेरे साथ है। तू कुवांरियों में श्रेष्ठ होगी। इस आशीष के
साथ उन्होंने मरियम को गिरजे की तीसरी सीढी पर खड़ा कर दिया। लोगों ने सोचा के बाकी
इस हैकल में आई थी। उसे देखते ही हमारे मुख्य-फरीसी ने उसके माथे को चूमा और आशीष दी
और कहा के 'हे मरियम, धन्य है तू। प्रभू तेरे साथ है। तू कुवांरियों में श्रेष्ठ होगी। इस आशीष के
साथ उन्होंने मरियम को गिरजे की तीसरी सीढी पर खड़ा कर दिया। लोगों ने सोचा के बाकी
बच्चों की तरह इस बच्ची को भी गोद में उठा कर ऊपर तक ले
जाना पड़ेगा। क्यों के आज
तक कोइ भी बच्चा अपने आप हैकल की पन्द्रह सीढीयां चढ़
कर पुण्य-स्थान तक नहीं पहुंचा।
पर मरियम को तो जैसे खुदा ने अपनी ताक़त से भर दिया
हो। वो फुदकती हुई सबसे ऊपर
जा पहुंची। वहां से मुख्य-फरीसी, ईश्वर की प्रेरणा से उसे उस स्थान पर ले गए जहां वाचा
की चाप रखी है। ये वो जगह होती है मुख्य-फरीसी के अलावा हम भी नहीं जा सकते, मरियम वहां
ले जाई गई।
फरीसी २ :- ये तो मुख्य-फरीसी की की
मेहरबानी थी के मरियम उस कक्ष में ले जाई गई जहां वाचा की चाप
रखी है। इसमें करिश्माई क्या है ?
फरीसी ४ :- और वो मरियम का अपने आप
पन्द्रह सीढीयां चढ़ कर पुण्य-स्थान तक पहुंचना ? क्या वो
करिश्मा नहीं है ?
फरीसी ३:- नहीं। बहुत से बच्चो
में दूसरे बच्चो से ज़्यादा ताक़त होती है और वो तमाम
ऐसे काम कर सकते
हैं जो दूसरे बच्चे नहीं कर पाते। इसका मतलब ये नहीं
के वो बच्चे करिश्माई हो गए।
फरीसी २:- कितनी आसानी से आप लोग हर चीज़
को करिश्मा मान लेते हैं।
फरीसी ४:- आप लोग मानें या ना माने, लेकिन सच है के मरियम साहेब-ए-करामात
है, आप उसके पास क्यों
नहीं जाते ? उसकी दुआ से
हर मरीज़ को शिफा मिलती है।
फरीसी ३:- अगर ये बात सच है, तो मरियम अपनें पाँव के दर्द का इलाज क्यों नहीं कर पाती ?
फरीसी ४;- आपको मालूम है
के मरियम के पाँव में दर्द ज़्यादा देर तक हालते नमाज़ में खड़े रहने के वजह से
पैदा हुवा है। अगर किसी का बच्चा भी बीमार हुवा तो वो
मोहतरमा मरियम के पास आ कर अपने
बच्चे के लिए शिफा की गुज़ारिश
करती है, मरियम उस बच्चे के सर पर हाथ रख कर दुवा
कर देती है और वो औरत खुशी खुशी लौट जाती है। मरियम
हमेशा गरीबों के साथ खड़ी होती है
और अक्सर अपना खाना भी उन गरीबों को खिला देती है, खुद भूखी सो जाती है।
फरीसी २:- अक्सर जो लोग ज़ियारत के लिए आते
हैं, चाह्ते हैं के मरियम से भी मुलाक़ात करें।
फरीसी ३:- अनजाने में आप लोग खुद भी मरियम
के प्रचारक बन चुके हैं। ओफ ये लोग और उनका
अंधविश्वास !
फरीसी २:- ये भी एक नया खेल और एक नया
तमाशा है।
फरीसी ३:- बाहरहाल, ये लोग एकदिन मरियम से भी तंग आ जायेंगे।
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दृश्य ६
रात का समय। एक गलियारे में कई औरतें लेटी या बैठी हैं। आहिस्ता आहिस्ता मरियम अंदर आती है। औरत नम्बर १
उसे देखती है लेकिन मरियम समझ नहीं पाती। वो सीधी चलती हुई ठंड से ठिठुरती औरत के पास पहुंचती है और उसे
अपनी चादर उढा देती है। चादर उड़ा कर वापस लौटते वक्त उसका पैरहन औरत नम्बर २ पकड़ कर याचना करती है।
औरत २:- मरियम ! तुम मरियम मुक़द्दस हो ना।
मरियम :- हाँ, मैं मरियम हूँ।
औरत २:- तुमसे मिलने के लिए, कई दिन की सफर की सख्तियां बर्दाश्त कर के यहां तक पहुंची हूँ। ए मरियम
मुक़द्दस ! मुझ पर रहम करो। मेरा छोटा बच्चा बीमार है और कोइ भी हकीम उसका इलाज नहीं कर
सका है। मेरा लाल मौत की दहलीज़ पर है। खुदा के लिए, रोटी का एक टुकड़ा उसकी शफा के लिए
दे दीजिये। खुदा के लिए।
मरियम हाँ में सर हिलाती है। धीरे से अपने लबादे के अंदर से रोटी का एक टुकड़ा निकाल कर उस औरत
को देती है। औरत एहसान से मरियम का हाथ चूमती है। यह सब कुछ औरत १ बड़े ध्यान से देखती है।
मरियम :- मैं आपके बेटे के लिए दुआ करूँगी।
यह कह कर मरियम दो कदम आगे बढ़ती है फिर कमज़ोरी से लड़खड़ा कर गिर जाती है। औरत १ यह
देख कर दौड़ती है और मरियम को सम्भाल लेती है।
औरत १:- मरियम। ज़रा सम्भल के। ज़रा एहतियात करो। उस बच्चे की बीमारी कभी ठीक नहीं हो सकती। तुम अपना
सारा खाना उन लोगों में तकसीम कर के खुद रोज़ा रख लेती हो।
मरियम फिर दो चार कदम आगे बढ़ती है और फिर लड़खड़ाती है। औरत १ उसे सहारा देती है।
औरत १:- बाज़ औरतें जो यहां पर आतीं हैं, उनके बच्चे बीमार नहीं होते। वो सिर्फ अपने दो वक्त की रोटी आपसे
ले लेती हैं। तबर्रुक और शफाकत का तो सिर्फ बहाना बनातीं हैं।
मरियम :- मुझे मालूम है। लेकिन कोइ बात नहीं।
यह कह कर मरियम दो कदम आगे बढ़ती है, लड़खड़ाती है और गिर कर बेहोश हो जाती है।
औरत १:- मरियम। मरियम
औरत २:- क्या हुवा ?
औरत १;- लगता है कमज़ोरी से बेहोश हो गईं।
बाकी औरतें भी उठ कर वहां आ जातीं हैं
औरत ३:- अरे बाप रे !
औरत ४:- हमें जल्दी यहां से निकलना चाहिये।
औरत १ :- इन्हें इस हालत में छोड़ कर ?
औरत ४:- और क्या करें।
औरत ३: अगर फरीसियों नें या हेरोडियस के सिपाहियों नें देख लिया तो समझेंगे के हमने कुछ कर दिया।
औरत २:- अरे हाँ, फिर तो बड़ी मुसीबत हो जाएगी।
औरत १:- लेकिन इन्हें यहां इस हालत में छोड़ कर जाना भी तो ठीक नहीं।
औरत २:- और हमारा यहां रुकना भी ठीक नहीं।
औरत १:- ये आप कह रही हैं ? जिसे चंद लम्हें पहले ही मरियम ने अपने मुँह का निवाला दिया था और खुद भूखी
रह गई थी।
औरत ४;- तो क्या एक वक्त के खाने के लिए वो अपनी जान जोखिम में डाल दे।
औरत २:- ओह तो ये आप बोल रही हैं। मत भूलिये के आप के जिस्म पर पड़ी जो ये चादर आपको ठंड से बचा
रही है, अभी चंद लम्हें पहले ही ये चादर मरियम ने आपको उढाई थी।
औरत ४:- तो वापस ले ले अपनी चादर, उसमें ऐसा क्या है ?
औरत १:- कैसी हैं आप सब ? मरियम मुक़द्दस के लिए ऐसी भावना ?
औरत २:- मरियम कोइ मुक़द्दस वुकद्दस नहीं है।
औरत ३:- मुक़द्दस औरत कहीं ऐसे कमज़ोर पड़ती है ?
औरत ४:- मुक़द्दस औरत अगर भूखी होती है तो उसके लिए कीमती फलों से भरी थाली आसमान से आती है
औरत २:- फरिश्ते खुद ले कर आते है।
औरत ३:- जिसमें होते हैं अंगूर, अंजीर, अनार
औरत ४:- खजूर, जैतून सेब
औरत १:- वाह ! जो ज़बानें मरियम मुक़द्दस मरियम मुक़द्दस कहते नहीँ थकती थीं वो अब मरियम के मुक़द्दस होनें
पर ही शक करने लगीं ?
औरत २:- हमारी मानिये और आप भी खिसक लीजिये।
औरत ३:- समझदारी इसी में है।
औरत १:- मैं इन्हें ऐसे छोड़ कर नहीं जा सकती।
औरत ३:- तो आप रहिये इनके साथ। हम लोग तो चलीं।
औरत २:- अरे नहीं ! इसको भी साथ ले चलो। अगर ये पकड़ी गई तो हम सब के बारे में भी बता देगी फिर हम सब
पकड़े जायेंगें।
बाकी औरतें:- हाँ ले चलो इसको भी। ना चले तो ज़बरदस्ती खींच क्र ले चलो।
औरत १:- ज़बरदस्ती की कोइ ज़रूरत नहीं। मैं खुद ही चली चलती हूँ। मरियम यहां खुदा की निगेहबानी में रहेंगी।
सब औरतें बाहर निकल जातीं हैं। मरियम वैसे ही लेटी रहती है। एक रूहानी संगीत उभरता है। आसमान
से एक थाली उतरती है जिसमें सभी ऊपर कहे गए फल मौजूद है। मरियम एक हाथ बढा कर अंगूरों
का गुच्छा उठाती है
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धीरे धीरे सुबह होती है भोर का प्रकाश कारों और फैल जाता है। मरियम चैन से सो रही है। जकरिया का प्रवेश। ज़करिया
प्यार से मरियम को जगाता है।
ज़करिया :- (सर पर हाथ फेरते हुवे) मरियम। मरियम। उठो मेरी बच्ची।
मरियम कसमसा कर उठती है
मरियम :- दादा जी आप ?
जकरिया हाँ।
मरियम :- (हैरत से) अरे ! मैं यहां कैसे आयी ?
ज़करिया :- क्या मतलब? कहां थी तुम ?
मरियम :- मैं तो हैकल के बाहर भूखों को खाना बांटने गई थी।
ज़करिया:- खाना बांटने ?
मरियम :- हाँ, मैं अपना खाना पहले भूखों को खिलाती हूँ, फिर उनसे जो बचता है खुद खाती हूँ।
ज़करिया :- ओह मेरी बच्ची !
मरियम :- कल रात भी मैं गरीब औरतों में खाना बांटने गई थी। मुझे भी उस वक़्त बहुत भूख लगी थी। कमज़ोरी
के मारे चला नहीं जा रहा था। तभी अचानक मैं गश खा कर गिर गई। फिर मैंने देखा के आसमान से
एक थाल जिसमे ढेर सारे फल थे मेरे सामने उतरी। मैंने भर पेट वो फल खाये। फिर मुझे कुछ याद
नहीं।
ज़करिया :- हमारा प्रभू बहुत दयालू है। वो हमें भूखा उठाता तो है लेकिन भूखा सुलाता नहीं। जैसे उसने आसमान से
बनी इसराइल के लिए मन्ना भेजा था वैसे ही कल उसने तुम्हारे लिए ग़िज़ा भेजी। खुदा जिसे चाहता है,
बे-हिसाब अता कर देता है। कौन कौन से फल थे उसमें ?
मरियम :- छह तरह के फल थे उसमें, और मेरे पसन्दीदा अंगूर भी थे।
ज़करिया :- अंगूर? इस मौसम में। लेकिन ये अंगूर के फलने का मौसम नहीं।
मरियम :- मेरा परवरदिगार किसी मौसम का मोहताज नहीं। वो अपने बन्दों को जो चाहे, जब चाहे, नवाज़ दे।
ज़करिया :- ठीक कहती हो बेटी। यहोवा बड़ा ही कारसाज़ है।
मरियम :- दादा जी, अक्सर मैं ये सोचती रहती हूँ के मेरी मां कब मुझसे मुलाक़ात करने को आएंगी। दिन और रात
गुज़रते रहते हैं लेकिन वो नहीं आतीं। मैं बहुत उदास हूँ।
ज़करिया :- तुम्हारी बातों से मुझे भी मेरी मां याद आ गई, जिसे मैं बहुत चाहता था। एक दिन मैं लकड़ियां जमा करने
के लिए जंगल की तरफ गया था, तभी अचानक एक बेचैनी सी मेरे दिल में भर गई। वो बेचैनी ठीक
वैसी ही थी जैसी बेचैनी से इस वक्त तुम दो-चार रही हो। जब मैं घर वापस आया, तो देखा के कुछ लोग
हमारे घर के सामने जमा हैं। घर में दाखिल हुवा, मां बिस्तरे पर पड़ी थी, उनकी आँखें बन्द थीं जैसे गहरी
नींद में सो रहीं हों, उनका चेहरा इंतहाई मुतमईन लग रहा था जैसे वो हमेशा के लिए इस दुनिया क़ो,
उसके दुखों को, मुसीबतों को तर्क कर गईं हों। उनके चेहरे का बोसा लिया, लेकिन वो नींद से नहीं उठीं,
मरियम :- (सुबकते हुवे) आप मुझे कुछ बताना चाहते हैं दादा जी ?
जकरिया हाँ में सर हिलाता है
मरियम :- (रोते हुवे) मेरी माँ के बारे में ?
ज़करिया हाँ में सर हिलाता है
मरियम :- क्या मेरी माँ भी। ...... मर गई ?
ज़करिया हाँ में सर हिलाता है
मरियम :- अब मैं समझ गई के मेरी माँ मुझसे मिलने क्यों नहीं आतीं।
मरियम धीरे से तस्बीह निकालती है, उठती है और बाहर जाने लगती है
ज़करिया :- मरियम। मेरी बेटी। कहां जा रही हो?
मरियम :- खुदा से दुआ करने के 'हे मेरे खुदा, मैं अपनी मां से महरूम हुई, उसे मैंने तेरे हवाले किया, ताकि तू उसे
अपनी मुहब्बत और जन्नत में जगह दे, मुझे भी तू अकेला मत छोड़ना, क्यों की इस वक्त मैं गमगीन
और उदास हूँ।
तस्बीह करते करते फ्रीज़ हो जाती है। जकरिया भी फ्रीज़। पूरा मंच अँधेरे में, केवल
मरियम पर प्रकाश का घेरा। रूहानी संगीत।
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जिब्राइल :- इस तरह मरियम खुदा की नज़दीकी में दिन गुज़ारती रही। सुलेमान के गिरजे की रीतिनुसार, वो भोर में
उठ कर प्रार्थना में लग जाती थी। दिन के नौ बजे से ले कर दोपहर तीन बजे तक वो बुनाई का काम
करती। तीन बजे से फिर वो दुआ में लग जाती थी। गिरजे से मिलने वाला खाना वो गरीबों में तकसीम
कर देती क्यों की उसका खाना तो हम फरिश्ते ले कर आते थे। रूहानी रिज़्क़ और फरिश्तों की संगत से
वो फरिश्तों से भी ज़्यादा पाक हो गई। धीरे धीरे वो करीब १४ बरस की होने को आई। दूसरी तरफ नबी
ज़कारिया के रिश्तेदार जो मन ही मन ज़कारिया से जलते थे और कोइ मौका नहीं छोड़ते थे उन्हें ज़लील
करने का, वो रिश्तेदार अपनी अपनी बीबियों को ज़कारिया की पत्नी एलीज़ाबेथ के पास भेजते जो एलीज़ाबेथ
के माँ न बन पाने पर तंज कस्ती, एलीज़ाबेथ दुखी हो कर रोतीं, जिससे ज़करिया का दिल टूटता। जब
मसला बहुत बढ़ गया और ज़करिया से रहा नहीं गया तो वो वो अपने रिश्तेदारों को उलाहना देने पहुंच
गए।
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दृश्य ७
ज़करिया के कई रिशेदार जमा हैं। जकरिया वहां उन्हें उलाहना देने पहुंच गए हैं।
ज़करिया :- क्यों ? आखिर क्यों ? आप लोग मेरे खानदान और मेरे ही खून से हो, मुझे इतना दुःख क्यों दे रहे हो ?
दूसरा भाई :- रुक जाओ ज़करिया। अब हम लोग भी शैतान के पैरोकार हैं? हमने हना के दिल को जलाया है?
अब हमें खुद को आप का रिश्तेदार नहीं कहना चाहिये ? लगता है के इस बुढापे ने आप का
होश-ओ-हवास को मोअत्तल कर दिया है। क्या ये आप नहीं थे जो मरियम को इबादतगाह
में ला कर उसकी मां की मौत का सबब बन गए ? क्या ये आप नही हैं जो शहर और इबादतगाह
में हर ख़ास-आम के लिए मज़ाक का सबब बन गए हो ? फिर भी अपनी नबूबत पर इसरार
कर रहे हो ? अगर तुम सच कहते हो, तो बताओ, तुम्हें औलाद क्यों नसीब नहीं हुई? सब जानते
हैं के तुम्हारी मौत के बाद, कोइ नहीं होगा जो तुम्हारे घर के चराग को रौशन रख सके। ज़करिया,
तुम तन्हा हो, तन्हा रहोगे और तन्हा ही मरोगे।
तीसरा भाई :- नाथन ! ये तुम क्या कर रहे हो? अपने भाई से ऐसी गुस्ताखी क्यों कर रहे हो? शर्म करो !
दूसरा भाई :- ज़करिया के पैरोकारों, उनके समर्थन के लिए आये हो? तो बताओ मुझे, अगर मैं झूठ बोल
रहा हूँ तो बताओ मुझे ! अगर ज़करिया का कोइ वारिस है तो बताओ मुझे। (हंसता है) ये
सिर्फ एक मज़ाक है।
सब हंसते हुए बाहर निकल जाते हैं। ज़करिया अकेला रह जाता है। वो अकेले में रोता है
और खुदा से शिकायत करता है।
ज़करिया :- ऐ खुदा। मैंने हमेशा खामोशी अख्तियार की और उनके तानों को हमेशा खून-इ-जिगर के साथ
बर्दाश्त किया। अब मुझमें इतनी कूवत नहीं के मैं ये सब बर्दाश्त कर सकूं। खुदाया मेरे जले
हुवे दिल को सुकून अता फरमा। (कुछ सोचता है) अगर खुदा बे-मौसम अंगूर भेज सकता है
तो क्या इस बुढापे में मुझे औलाद नहीं दे सकता ? वो बेहिसाब आता करता है, बेहिसाब। फिर
ये बात मैं इतनी देर से क्यों समझा ? और तूने मेरे इस बुढापे में मुझे अपनी मरियम की जुबां
से ये बात बता कर समझाई। मैं कितना गाफिल और बद-नसीब था के इस से पहले मैंने इस
नेमत को तेरे खज़ाना-ए-रहमत से नहीं माँगा।
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Fade In
जिब्राइल ;- और ज़करिया मेहराबे-नमाज़ में खड़ा हो गया और कहा 'आए मेरे रब, मुझे अपनी मौत के बाद
अपने रिश्तेदारों से डर है, लेकिन तू जिसे चाहता है, बे-हिसाब अता करता है, फिर मुझे एक
वारिस आता कर जो खानदान-ए-याकूब का जां-नशीन हो। और ऐ मेरे रब, उसे अपना मकबूल
बन्दा बना दे। तो मैंने ही उससे कहा के ' ऐ ज़करिया, हम आप को खुशखबरी देते हैं, उस बच्चे की
जिसका नाम तू यूहन्ना रखना, और खुदा ने इससे पहले उसका हमनाम भी किसी को नहीं कहा।
और तुम्हारा ये बेटा उस मसीहा की जो जल्द ही पैदा होने वाला है, तस्दीक करेगा। और
ज़करिया ने कहा 'ऐ मेरे रब, मेरे यहां लड़का कैसे होगा, जबके मेरी बीबी बाँझ है और मैं खुद
बुढापे की आखरी दहलीज पर पहुंच चुका हूँ ? इरशाद हुवा के 'नहीं, ऐसा ही होगा। तेरे रब ने
फरमाया है, के मेरे लिए ये बिलकुल आसान है, और तू पहले खुद कुछ ना था, और उसने तुझे
पैदा किया। और तेरे लिए खुशखबरी है उस बेटे की, जो अपनी कौम का बुज़ुर्ग और पेशवा होगा
जिसे खुदा बचपन ही में हिकमत अता कर देगा और जो अपनी कौम का पैगम्बर होगा।
ज़करिया ने अर्ज़ किया के ऐ परवरदिगार, मेरे लिए कोइ अलामत मुकर्रर फरमा तू। इरशाद
हुवा के तेरे लिए अलामत ये है के तुम तीन दिन तक किसी शख्स से बोल ना सकोगे।
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दृष्य ८
एक सड़क का दृश्य। कुछ लोग इधर उधर जमा हो कर यूं ही व्यर्थ समय व्यतीत कर रहे हैं।
आदमी १:- जिस प्रकार जिरजे में सर्राफ़ो और जानवर बेचने वालों की दुकानें खुलती जा रही हैं
उससे तो लगता है जैसे जल्द ही ये गिरजा किसी बाज़ार में तब्दील हो जायेगा।
आदमी २:- काश कोइ ऐसा हो जो सर्राफों के पीढ़े और कबूतर बेचने वालों की चौकियां उलट दे।
आदमी १:- अरे इतना ही नहीं ! मैं तो चाह्ता हूँ के कोई ऐसा हो जो इन सबको कोड़े लगाए, इनकी भेड़
बकरियों को भगा दे और इनके सिक्कों को बिखरा दे।
आदमी :- काश कोइ तो हो !
दूसरी तरफ :-
आदमी ३:- हेरोडियस पगलाया घूम रहा है।
आदमी ४:- क्यों ?
आदमी ३:- मसीहा की पैदाइश के ख़्वाब ने उसकी नींदे उड़ा रखी हैं।
आदमी ४:- जितना वो पगलाएगा, उतनी हम लोगों की मुसीबतें बढ़ेंगी।
तीसरी तरफ दो औरतें
औरत १:- अभी डेबरा दिखी थी रास्ते में, अपनी नई तलित पर इतरा रही थी।
औरत २:- अरे इसमें इतराने की क्या बात है। मैंने भी तो नई तलित ली है, कल पहनी भी थी। तुमने देखी
नहीं।
औरत १:- देखी थी, लेकिन उसकी तलित तुम्हारी तलित से ज़्यादा बढ़िया है।
औरत २ :- तुम्हें अच्छे बुरे की तमीज़ ही नहीं है।
औरत १ :- हाँ सारी तमीज़ सिर्फ तुम्हें ही है।
दो लोग अलग कोने में
आदमी ५:- इस बार फसल भी कुछ ठीक होने के आसार लग रहे हैं।
आदमी ६ :- लगता है हमारे भी अच्छे दिन आने वाले हैं।
आदमी ५:- हमारे अच्छे दिन तो तब आएंगे जब हमारा मसीहा पैदा होगा।
आदमी ६ :- और वो मसीहा कब पैदा होगा ?
आदमी ५:- जब आसमान में एक नया सितारा दिखाई देगा।
आदमी ६:- लेकिन वो सितारा कब दिखाई देगा ?
आदमी ५:- जब एक कुंवारी मां बनेगी।
आदमी ६:- कुंवारियां कहीं मां बन सकती है?
\आदमी ५ :- भविष्यवाणी तो यही कहती है।
आदमी ६:- भाई आप तो नजूमी हो ! सितारों की गड़ना क्या कहती है ?
आदमी ५:- वो सितारा उदय हो चुका है। लेकिन अभी हमारे आसमान पर नहीं दिख रहा।
आदमी ६ :- तो किस आसमान पर दिख रहा है ?
आदमी ५:- दूर हिन्दोस्तां, फारस और अरब के आसमान पर। जब वो सितारा चलता हुआ यहां पहुंच जायेगा
तो समझ लेना के मसीहा के आमद की घड़ी आ पहुंची है।
आदमी ६:- आओ मेरे मसीहा जल्दी आओ।
तभी एक आदमी चिल्लता हुवा आता है
आदमी :- लोगों चमत्कार हो गया है चमत्कार।
सभी उसकी तरफ देखने लगते है
आदमी १:- क्या चमत्कार हुवा है ?
आदमी :- ज़करिया की बीबी पेट से है।
आदमी २:- बौरा तो नहीं गए हो। कहीं इस उम्र में किसी की गोद भर्ती है ?
आदमी :- नहीं मैं सच कह रहा हूँ।
औरत १:- तुम्हें कैसे मालूम के वो पेट से है ?
आदमी :- दाई ने उनका मुआयना किया है, उसी ने बताया के एलीज़ाबेथ के पेट में बच्चा है।
आदमी ३:- अगर ऐसी बात है तो ये वाकई एक चमत्कार है।
आदमी ४:- ज़करिया क्या कहते हैं ?
आदमी :- ज़करिया खामोश हैं
आदमी ५:- क्यों ?
आदमी :- उन्होंने एक पाटी पर लिख कर बताया के खुदा ने ये अलामत मुकरर की है के वो तीन दिनों तक
कुछ भी बोल न सकेगा।
आदमी ६:- किस बात की अलामत ?
आदमी :- यही के इस उमर में वो बाप बनेंगे।
आदमी १:- अच्छा ?
आदमी २:-हाँ। और देखो ये खबर भी आ गई।
आदमी :- हाँ।
औरत २ :-देखा खुदा का वादा ? कैसा पूरा हो गया
औरत १ :- मैं नहीं कहती थी, के वो खुदा का नबी है ?लेकिन पादरी हमेशा उनका मज़ाक उड़ाते थे।
आदमी ३ :- इब्राहीम की तरह खुदा ने ज़करिया को बुढापे में औलाद आता की।
आदमी :- और तो और, खुदा ने उस बच्चे का नाम भी मुकरर कर दिया है, यूहन्ना।
आदमी १ :- यूहन्ना ? ये कैसा नाम हुवा ? क्यों नजूमी? आप क्या कहते हैं?
आदमी ५:- यूहन्ना का मतलब है, भरपूर ज़िन्दगी। वो शहीद होगा और हमेशा ज़िंदा जावेद रहेगा।
उसका नाम दुनिया के इतिहास में अमर रहेगा।
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Fade In
जिब्राइल:- आज मसीही गिरजों में औरत और मर्द, पादरियों के साथ बराबर से दुआ करते हैं। लेकिन क्या
आप जानते हैं के यहूदी गिरजे में जिसे हैकल भी कहा जाता है, वहां औरतों के लिए पादरियों
के साथ दुआ करने की मनाही थी। पादरियों के साथ तो क्या मर्दों के साथ भी दुआ करने की
मनाही थी। गिरजे में औरतों के लिए एक अलग दलान था। औरतें बस उस दलान तक ही
सीमित रहती थीं। उसके आगे जाने की हिम्मत करने वाली औरत के लिए सज़ा-इ-मौत मुकरर
थी। लेकिन एक दिन मरियम ने ये परम्परा तोड़ दी। एक दिन मरियम को प्रेरणा हुई और वो गिरजे
के उस हिस्से में दुआ करने जा पहुंची जहां सारे पादरी दुआ कर रहे थे। बस फिर क्या था। यहूदी
पादरियों को लगा के एक औरत ने मर्दों की सत्ता को चुनौती दी है। सब अंदर तक हिल गए।
मरियम पर फैसला लेने के लिए सभा बुलाई गई। सच बात तो ये है के वो मरियम के बहाने
ज़करिया से भी अपनी दुश्मनी निकालना कहते थे।
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दृश्य १०
फरीसियों की सभा
फरीसी १ :- कोइ बात नहीं ? इतना बड़ा गुनाह हो गया और तुम कह रहे हैं के कोइ बात नहीं ! तुम तो एक
ज़माने में हमारी शरीयत के उस्ताद थे, आज कैसे कह रहे हो के कोइ बात नहीं।
फ़रीसी २ :- साफ कह दो के कौमें यहूद में सुलेमान के गिरजे को चलाने की सलाहियत नहीं है।
फरीसी ३ :- हारुन और मूसा की शरीयत को छोड़ कर सब को फारिग कर दें सब को। क्या ज़रूरत है
दुआ और कुर्बानी की और बाकी की रस्में अदा करने की
फरीसी ४ :- कल से हमे सैडून के खुदा अस्तर, मोईब के खुदा कामूश और फैशुनियो के खुदा मलूकी की
इबादत करनी होगी।
फ़रीसी १:- या फिर अब हमें हेरोदियस की मूर्ती अपनी इबादत गाह में लगा कर उसकी इबादत शुरू करनी
होगी।
फरीसी २:- हमें जल्दी से इस सैन्हेद्रिन में जकरिया और मरियम का फैसला करना होगा ताकी आइंदा कोइ
हमारी शरीयत का मज़ाक न उड़ा सके।
सब फरीसी :- हां हां ठीक है ये बिलकुल ठीक है।
जकरिया :- तुम लोग भी अच्छी तरह सुन लो, क्या तुम लोग अपने गरेबान में झाँक कर ये नहीं देख रहे हो
के मूसा और खुदा के आदेश की तुम लोग किस तरह खिलाफत कर रहे हो ? और फिर खुद को
उनकी शरीयत का महाफिज़ समझते हो ! कुर्बानी और आग जलाने के अलावा, लोगों को तुमसे
और कौन सा फायदा हासिल होता है ? क्या यहोवा ने यह नहीं फरमाया है के मैं कुर्बानी को नहीं
बल्कि रहमत और मुहब्बत को पसन्द करता हूँ ? और आग के बजाए मारिफत -ए-इलाही को
मानता हूँ। लेकिन क्यों आप लोगों दिलों में रहमत और मुहब्बत का असर भी नहीं है ? क्यों ?
खुदा कहता है के मुझे आप लोगों के मज़हबी तहवारों महफिलों से सख्त नफरत है और मैं इन
महफिलों और तहवारों को पसन्द नहीं करता। मैं आप लोगों के इस तरह आग जलाने, न्याज़ देने
और कुर्बानी देने को कबूल नहीं करता।
सब लोग सर झुकाये सुनते हैं
जकरिया :- क्या आप लोगों ने किताब-इ-मुक़द्दस में नहीं पढ़ा है, जिसमें इरशाद है के इबादत की जंजीरों
को तोड़ दो, और लोगों को गुलामी से निजात दिलाओ, मज़लूमों को आज़ाद और बेघर गरीब
लोगों को अपने घरों में पनाह दो। जो नँगे है उन्हें कपड़े पहनाओ, अपने खानों में भूखों को भी
शरीक करो, और अपने रिश्तेदारों की मदद करते फिरो। आप लोगों नें ये बातें जोशुआ नबी की
किताब में भी पढी हैं फिर ? फिर उसपर अम्ल क्यों नहीं करते हो ?
सब खामोश
फरीसी ३ :- जनाबे-इ-जकरिया ने, तौरेत की मुक़द्दस आयत याद दिला कर हमें नसीहत की है जिसके हम
उनके मशकूर हैं। और अब मैं भी इस इबादतगाह और उसमें मरियम की मौजूदगी के मुताल्लिक
उनसे कुछ सवालात करना चाहता हूँ। और मुझे उम्मीद है जवाब देंगे। क्या आप ये बात तस्लीम
करते हैं के किताब-ए-मुक़द्दस में हमेशा से बनी-ए-इस्राइल के बेटों का ज़िक्र है न की बनी-ए-
इसराइल की बेटियों का।
जकरिया :अगर आप की मुराद कौम और कबीले से है। ...
फरीसी ३:- क्या आप ये भी तस्लीम करते हैं के एक लड़की की कद्र-ओ-कीमत हमारे नज़दीक उसी मुआवजे
के बराबर है जो लड़की का बाप वसूल करता है और वो अपनी बेटी को उसके शौहर के हाथ बेच
देता है। और फिर शादी के बाद उसका शौहर उसका मालिक बन जाता है?
ज़करिया :- आप के नज़दीक तो ये ठीक है लेकिन। ...
फरीसी ३:- और आप जानते हैं के मर्द अपनी दौलत और हैसियत के हिसाब से जितनी चाहे बीबियाँ और
कनीजें रख सकता है ?
ज़करिया :- ठीक। लेकिन ये काम.........
फरीसी ३:- बेहतर जानते हैं के ख्वातीन का दाखिला पादरियों के कक्ष में न केवल वर्जित है, बल्कि इसके
लिए मौत की सज़ा भी मुकरर है ? आपको ये भी मालूम है के कुर्बानी में हिस्सा लेना, यहां तक
के उसको देखना भी औरतों के लिए जायज़ नहीं है।
जकरिया :- मैं कुर्बानी के बारे......
फरीसी ३:- अब मैं आप से पूछना चाह्ता हूँ, के क्या आप को यहूदी मजहब में औरतों के लिए मुकरर
पाबन्दियों का इल्म है की नहीं ?
ज़करिया :- (कमजोर आवाज़ में) मुझे इल्म है। जिस यहूदी मज़हब की तुम लोग पैरवी कर रहे हो ये
पैबन्दियाँ उसी की पैदावार हैं। लेकिन हकीकत ये है की हज़रत मूसा की शरीयत में औरतों
को बड़ा मकाम दिया गया है। आप खुद बेहतर जानते हैं के मर्दों की शख्सियत औरतों के द्वारा
दी गई शिक्षा पर निर्भर करती है। मर्द की पहली उस्ताद उसकी मां ही होती है। वो ही उसे उंगली
पकड़ कर पहला कदम रखना सिखाती है। पहला शब्द जो आप सबके मुँह से निकला था, वो था
'मां' और आप औरतों के बारे ऐसे ख्यालात रखते हैं? शर्म आनी चाहिये आप लोगों को और हर
उस शख्स को औरतों को अपनी मिल्कियत या गुलाम समझते हो।
फरीसी ३:- (तेज़ आवाज़ में) आपको पाबन्दियों का इल्म है के नहीं ? क्या आपने मरियम से कहा था के
वो पादरियों के साथ खड़ी हो कर दुआ में शिरकत करें ?
ज़करिया :- नहीं। मैंने उसे इजाज़त नहीं दी।
फरीसी ३:- फिर वो किसकी इजाज़त से वहां दाखिल हुई ?
जकरिया :- मुझे नहीं पता।
फरीसी ३:- मैं ज़करिया, अबिया खानदान के सर्वरा को नाहिद करार देता हूँ। ये बुड्ढा या तो पागल हो गया
है, या उस बच्ची ने इस पर जादू कर के इसे अपने काबू में कर लिया है। अब मैं आप मोमिन
और परहेज़गार पादरियों से सवाल करता हूँ के, क्या आप लोग ये कबूल करेंगे के अब से
इस इबादतगाह में, औरतें भी मर्दों के साथ दुआ में शामिल हों ?
सब :- नहीं कबूल करेंगे नहीं करेंगे।
फरीसी ३:- क्या आप लोगों को मंज़ूर है के ज़करिया और मरियम को सख्त से सख्त सज़ा दी जाए।
सब :- दोनों को जला देना चाहिये। (का शोर होने लगता है)
मुख्य फरीसी :- खामोश। आप सब खामोश रहिये। इंतेहा पसन्दी से गुरेज़ करें।
सब खामोश हो जाते हैं
मुख्य फरीसी :- मरियम ने जो किया है वो वाकई शरिया के खिलाफ है और ना-काबिल-ए-माफी है।
लेकिन हमें ये भी देखना होगा के इतने सालों में मरियम ने कभी कोइ ऐसा काम
नहीं किया जिससे शरिया की ना-फरमानी होती हो। हो सकता है उसने ये काम किसी
गफलत में कर दिया हो। इस लिए मरियम को सन्देह का लाभ देते हुए कोइ बड़ी
सज़ा नहीं दी जाती है। वैसे भी अब मरियम की घर वापस जाने की उम्र हो चुकी है।
इस लिए मरियम को इसी वक्त गिरजा छोड़ कर वापस जाने का हुक्म दिया जाता है
और ज़करिया को ताकीद की जाती है के वो मरियम की जल्दी से जल्दी शादी का इंतज़ाम
करें।
जकरिया :- जी। मरियम की शादी नासरत नगर के यूसुफ नामक दाऊद के घराने के एक युवक के साथ
तय की जा चुकी है और जल्द ही मंगनी भी कर दी जाएगी।
मुख्य फरीसी :- बेहतर होगा।
फरीसी ३:- और जकरिया के लिए सज़ा ?
मुख्य फरीसी :- ये कहीं भी साबित नहीं हुवा के मरियम ने जो किया उसमें कहीं भी ज़करिया की सहमती
थी। इसलिए ज़करिया के लिए किसी भी सज़ा की बात ही नहीं पैदा होती।
Fade Out
जिब्राइल :- और फिर मरियम हैकल से निकल कर अपने घर, गलील के नाजरथ नगर को आ गई। घर पर भी
वो पूरी तरह से खुदा की इबादत में डूबी रहती और लोगों की भलाई के कामों में लगी रहती। उसकी
मंगनी दाऊद के घराने के यूसुफ़ नामक व्यक्ति से हो चुकी थी। यूसुफ़ पेशे से एक बढ़ई था जो
के खुद भी एक खुदा परस्त व्यक्ती था और अपना पेशा भी बहुत ही ईमानदारी से करता था।
भले ही वो गरीब था लेकिन उस पर खुदा की बरकत थी।
एक दिन मरियम जब अपने बीमार रिश्तेदार से मिल कर घर लौटी तो उसने पाया के उसके घर
परपलज़ जो की रूमी सिपहसालार था, अपनी पत्नी के साथ मरियम के इंतज़ार में खड़ा
था। उसकी पत्नी की गोद में एक बच्ची भी है।
मरियम :- आप ?
परपज़ :- मैं हूँ परपज़ । रूमी सेना का सिपहसालार। ये मेरी पत्नी है सेराफीना । हमारे यहां आने का
मकसद ये है के लोगों की नज़रों से दूर आपसे मुलाक़ात करें। इसलिए रात स्याह अँधेरे में मिलने
आये हैं। हमारी तुमसे एक दरख्वास्त है। अगर तुमने हमारी बीमार बेटी को शफा दी मैं तुम्हें सोने
की दस थैलियां दूंगा। और ये दस थैलियां सिर्फ तुम्हारी होंगी। तुम ये दस थैलियां रख सकती हो
मरियम। क्या तुम समझ रही हो ?
सेराफीना :- परपज़ ! क्या आप खामोश नहीं रह सकते ? ये आपका इस मुक़द्दस औरत से बात करने का कौन
सा तरीका है ?
मरियम चल कर उसकी पत्नी तक जाती है
मरियम :- (बच्ची का सर सहलाते हुवे ) कितनी प्यारी बच्ची है। अरे ! कितना तेज़ बुखार है इसको !
सेराफीना :- ये जब से पैदा हुई है, बीमार है। रूम के हकीमों से भी इसका इलाज नहीं हो सका। अब हमारा
अपने तमाम दोस्तों और रिश्तेदारों से से दूर यहां आने का मकसद इस बच्चे की सेहतयाबी
है। इसकी बीमारी की शिद्दत में रोज़-ब-रोज़ इज़ाफ़ा हो रहा है। मैं क्या करूं? अगर ये मर गई
तो मैं भी ज़िंदा रहने के काबिल नहीं रहूंगी।
परपज़ :- सेराफीना को तुम्हारी शोहरत का इल्म हुवा था। और इसरार कर रहीं थी के अब हमारी तमाम
उम्मीदें खत्म गईं हैं। सिवाय तुम्हारे मरियम। अब क्या तुम हमारी मदद करोगी ?
मरियम :- मुझे अफसोस है, के मैं कुछ नहीं कर सकती।
सरफीना हताशा से रोने लगती है
परपज़ :- (कड़े स्वर में) सुनो लड़की। अगर मेरी बेटी को शफा दोगी तो मैंने जितना तुमसे वादा किया है,
उससे भी ज़्यादा दूंगा। अपना सब कुछ तुम्हें दे दूंगा। एक बार। सिर्फ एक बार हम पर रहम
करो। इस गैर यहूद खानदान की मदद कर दो।
मरियम :- देखिये, मैं कुछ भी नहीं कर सकती। सब कुछ खुदा की रज़ा और इरादे से है। वो जो सारी दुनिया
का रब है। हम सब की शफा उसी के हाथ में है। मैं। .... मैं इस बच्चे के लिए सिर्फ दुआ ही कर
सकती हूँ
सेराफिना :- (खुश हो कर) दुआ करेगी। दुआ करेगी।
मरियम उस बच्चे के सर पर हाथ फेरती है और दुआ करती है
मरियम :- (दुआ के बाद परपज़ से) बीबी और औलाद से तुम्हारी ये मुहब्बत, तुम्हें इस मुसीबत से निजात
दिलाएगी।
सेराफिना :- उतर रहा है। देखिये परपज़। बच्ची का बुखार कितना कम हो गया। ऐ मुक़द्दस मरियम।
तू ज़िंदाबाद रहे । रब की मेहर तुझ पर सदा बनी रहे।
परपज़ :- (थैली देते हुवे) ये रही सोने से भरी दस थैलियां, सिर्फ तुम्हारे लिए।
मरियम :- मैं दुआओं की तिज़ारत नहीं करती। ये मेरे परवरदिगार की मर्ज़ी थी के इस बच्ची को शफा मिले
तो मिल गई। इसमें मेरा क्या है। अगर वो नहीं चाह्ता तो कुछ भी ना होता। अब आप लोग जाएँ
और परमेश्वर की महिमा करें। मेरी दुआ का वक्त हो गया है।
दोनों सर झुका कर बाहर निकल जातें हैं। मरियम उन्हें जाते हुवे देखती है। फिर तस्बीह
निकालती है और आँखें बन्द कर दुआ में लीन हो जाती है। एक रूहानी संगीत उभरता है।
कमरा रूहानी रोशनी से भर जाता है। जिब्राइल का प्रवेश।
जिब्राइल :- आनन्द और जय मरियम तेरी हो जिस पर प्रभू का अनुग्रह हुवा है। प्रभू तेरे साथ है।
मरियम :- (घबरा कर) ये कैसा अभिवादन है ? कौन हैं आप ?
जिब्राइल:- डरो मत मरियम। क्यों की परमेश्वर का अनुग्रह तुम पर हुवा है। ये तुम्हारे रब का पैगाम है।
खुदा ने तुझे पाक कर दिया। और तमाम ख्वातीन में से तुम्हें एक अज़ीम मकसद लिए
मुन्तख़ब किया है। देख तू गर्भवती होगी, तेरे एक पुत्र उतपन्न होगा। तू उसका नाम येशू रखना।
वह महान होगा और परम-प्रधान का पुत्र कहलायेगा। और प्रभू परमेश्वर उसके पिता दाऊद का
सिंहासन उसको देगा। वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा। और उसके राज्य का का कभी
अंत ना होगा।
मरियम :- लेकिन मेरे यहां पुत्र क्यों कर होगा ? मैं तो किसी पुरुष को जानती ही नहीं।
जिब्राइल:- पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परम्-प्रधान की सामर्थ्य तुझ पर छाया करेगी। इसीलिये
वह पवित्र उतपन्न होने वाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलायेगा। और देख, तेरी कुटुम्बनी कुटुम्बनी
एलीज़ाबेथ के भी बुढापे में पुत्र होने वाला है, ये उसका, जो बाँझ कहलाती थी छठवां महीना है।
क्यों की जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरहित नहीं होता।
मरियम :- देख, मैं प्रभू की दासी हूँ, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो।
Fade Out
जिब्राइल :- ये थी माता मरियम के शुरुआती दिनों की दास्तान के कुछ अंश। आगे की कहानी आपने आपने
अपने सन्डे-स्कूल में सुनी होगी। कौन कौन जाता है सन्डे स्कूल ? हाथ उठाइये। हाँ। सन्डे स्कूल
ज़रूर जाया करें। वैसे आगे कहानी आप लोग कैंडल नाइट सर्विस में खेले जाने वाले नेटिविटी
नाटकों में भी देखते हैं और पवित्र बाइबल में भी पढ़ते हैं।
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धीरे धीरे सुबह होती है भोर का प्रकाश कारों और फैल जाता है। मरियम चैन से सो रही है। जकरिया का प्रवेश। ज़करिया
प्यार से मरियम को जगाता है।
ज़करिया :- (सर पर हाथ फेरते हुवे) मरियम। मरियम। उठो मेरी बच्ची।
मरियम कसमसा कर उठती है
मरियम :- दादा जी आप ?
जकरिया हाँ।
मरियम :- (हैरत से) अरे ! मैं यहां कैसे आयी ?
ज़करिया :- क्या मतलब? कहां थी तुम ?
मरियम :- मैं तो हैकल के बाहर भूखों को खाना बांटने गई थी।
ज़करिया:- खाना बांटने ?
मरियम :- हाँ, मैं अपना खाना पहले भूखों को खिलाती हूँ, फिर उनसे जो बचता है खुद खाती हूँ।
ज़करिया :- ओह मेरी बच्ची !
मरियम :- कल रात भी मैं गरीब औरतों में खाना बांटने गई थी। मुझे भी उस वक़्त बहुत भूख लगी थी। कमज़ोरी
के मारे चला नहीं जा रहा था। तभी अचानक मैं गश खा कर गिर गई। फिर मैंने देखा के आसमान से
एक थाल जिसमे ढेर सारे फल थे मेरे सामने उतरी। मैंने भर पेट वो फल खाये। फिर मुझे कुछ याद
नहीं।
ज़करिया :- हमारा प्रभू बहुत दयालू है। वो हमें भूखा उठाता तो है लेकिन भूखा सुलाता नहीं। जैसे उसने आसमान से
बनी इसराइल के लिए मन्ना भेजा था वैसे ही कल उसने तुम्हारे लिए ग़िज़ा भेजी। खुदा जिसे चाहता है,
बे-हिसाब अता कर देता है। कौन कौन से फल थे उसमें ?
मरियम :- छह तरह के फल थे उसमें, और मेरे पसन्दीदा अंगूर भी थे।
ज़करिया :- अंगूर? इस मौसम में। लेकिन ये अंगूर के फलने का मौसम नहीं।
मरियम :- मेरा परवरदिगार किसी मौसम का मोहताज नहीं। वो अपने बन्दों को जो चाहे, जब चाहे, नवाज़ दे।
ज़करिया :- ठीक कहती हो बेटी। यहोवा बड़ा ही कारसाज़ है।
मरियम :- दादा जी, अक्सर मैं ये सोचती रहती हूँ के मेरी मां कब मुझसे मुलाक़ात करने को आएंगी। दिन और रात
गुज़रते रहते हैं लेकिन वो नहीं आतीं। मैं बहुत उदास हूँ।
ज़करिया :- तुम्हारी बातों से मुझे भी मेरी मां याद आ गई, जिसे मैं बहुत चाहता था। एक दिन मैं लकड़ियां जमा करने
के लिए जंगल की तरफ गया था, तभी अचानक एक बेचैनी सी मेरे दिल में भर गई। वो बेचैनी ठीक
वैसी ही थी जैसी बेचैनी से इस वक्त तुम दो-चार रही हो। जब मैं घर वापस आया, तो देखा के कुछ लोग
हमारे घर के सामने जमा हैं। घर में दाखिल हुवा, मां बिस्तरे पर पड़ी थी, उनकी आँखें बन्द थीं जैसे गहरी
नींद में सो रहीं हों, उनका चेहरा इंतहाई मुतमईन लग रहा था जैसे वो हमेशा के लिए इस दुनिया क़ो,
उसके दुखों को, मुसीबतों को तर्क कर गईं हों। उनके चेहरे का बोसा लिया, लेकिन वो नींद से नहीं उठीं,
मरियम :- (सुबकते हुवे) आप मुझे कुछ बताना चाहते हैं दादा जी ?
जकरिया हाँ में सर हिलाता है
मरियम :- (रोते हुवे) मेरी माँ के बारे में ?
ज़करिया हाँ में सर हिलाता है
मरियम :- क्या मेरी माँ भी। ...... मर गई ?
ज़करिया हाँ में सर हिलाता है
मरियम :- अब मैं समझ गई के मेरी माँ मुझसे मिलने क्यों नहीं आतीं।
मरियम धीरे से तस्बीह निकालती है, उठती है और बाहर जाने लगती है
ज़करिया :- मरियम। मेरी बेटी। कहां जा रही हो?
मरियम :- खुदा से दुआ करने के 'हे मेरे खुदा, मैं अपनी मां से महरूम हुई, उसे मैंने तेरे हवाले किया, ताकि तू उसे
अपनी मुहब्बत और जन्नत में जगह दे, मुझे भी तू अकेला मत छोड़ना, क्यों की इस वक्त मैं गमगीन
और उदास हूँ।
तस्बीह करते करते फ्रीज़ हो जाती है। जकरिया भी फ्रीज़। पूरा मंच अँधेरे में, केवल
मरियम पर प्रकाश का घेरा। रूहानी संगीत।
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जिब्राइल :- इस तरह मरियम खुदा की नज़दीकी में दिन गुज़ारती रही। सुलेमान के गिरजे की रीतिनुसार, वो भोर में
उठ कर प्रार्थना में लग जाती थी। दिन के नौ बजे से ले कर दोपहर तीन बजे तक वो बुनाई का काम
करती। तीन बजे से फिर वो दुआ में लग जाती थी। गिरजे से मिलने वाला खाना वो गरीबों में तकसीम
कर देती क्यों की उसका खाना तो हम फरिश्ते ले कर आते थे। रूहानी रिज़्क़ और फरिश्तों की संगत से
वो फरिश्तों से भी ज़्यादा पाक हो गई। धीरे धीरे वो करीब १४ बरस की होने को आई। दूसरी तरफ नबी
ज़कारिया के रिश्तेदार जो मन ही मन ज़कारिया से जलते थे और कोइ मौका नहीं छोड़ते थे उन्हें ज़लील
करने का, वो रिश्तेदार अपनी अपनी बीबियों को ज़कारिया की पत्नी एलीज़ाबेथ के पास भेजते जो एलीज़ाबेथ
के माँ न बन पाने पर तंज कस्ती, एलीज़ाबेथ दुखी हो कर रोतीं, जिससे ज़करिया का दिल टूटता। जब
मसला बहुत बढ़ गया और ज़करिया से रहा नहीं गया तो वो वो अपने रिश्तेदारों को उलाहना देने पहुंच
गए।
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दृश्य ७
ज़करिया के कई रिशेदार जमा हैं। जकरिया वहां उन्हें उलाहना देने पहुंच गए हैं।
ज़करिया :- क्यों ? आखिर क्यों ? आप लोग मेरे खानदान और मेरे ही खून से हो, मुझे इतना दुःख क्यों दे रहे हो ?
क्या बिगाड़ा
है मैंने आप लोगों का ? मैं आप चाचा-जात भाइयों के लिए जो आहिस्ता आहिस्ता खुदा से
दूर होते जा रहे
हैं, बहुत फिकरमंद हूँ। आपकी इन बातों से मरियम की मां हन्ना का भी दिल टूट गया
था। आपकी मुखालफत और दुश्मनी की वजह से मेरा और एलिज़ाबेथ की ज़िन्दगी मुश्किल और ना-
काबेल-ए-बर्दाश्त हो गई है। हमारा जुर्म क्या है ? यही की हमारी कोइ औलाद नहीं ? लेकिन हमने तो
खुदा की रज़ा के आगे सर झुका दिया है।
एक भाई :- सुनो ज़करिया सुनो।
ज़करिया :- नहीं नहीं मेरी बात कोइ मत काटो। कान खोल कर सुन लो। अब हमारे और आपके बीच खानदानी रिश्ता
मजीद कायम नहीं रहेगा। मुझे फिक्र है के मेरे मरने के बाद, मेरे खानदान के साथ तुम लोग क्या सलूक
करोगे ? मैं आप लोगों की खुदा से शिकायत करूंगा।
ज़करिया जाने लगता है।
दूसरा भाई :- रुक जाओ ज़करिया। अब हम लोग भी शैतान के पैरोकार हैं? हमने हना के दिल को जलाया है?
अब हमें खुद को आप का रिश्तेदार नहीं कहना चाहिये ? लगता है के इस बुढापे ने आप का
होश-ओ-हवास को मोअत्तल कर दिया है। क्या ये आप नहीं थे जो मरियम को इबादतगाह
में ला कर उसकी मां की मौत का सबब बन गए ? क्या ये आप नही हैं जो शहर और इबादतगाह
में हर ख़ास-आम के लिए मज़ाक का सबब बन गए हो ? फिर भी अपनी नबूबत पर इसरार
कर रहे हो ? अगर तुम सच कहते हो, तो बताओ, तुम्हें औलाद क्यों नसीब नहीं हुई? सब जानते
हैं के तुम्हारी मौत के बाद, कोइ नहीं होगा जो तुम्हारे घर के चराग को रौशन रख सके। ज़करिया,
तुम तन्हा हो, तन्हा रहोगे और तन्हा ही मरोगे।
तीसरा भाई :- नाथन ! ये तुम क्या कर रहे हो? अपने भाई से ऐसी गुस्ताखी क्यों कर रहे हो? शर्म करो !
दूसरा भाई :- ज़करिया के पैरोकारों, उनके समर्थन के लिए आये हो? तो बताओ मुझे, अगर मैं झूठ बोल
रहा हूँ तो बताओ मुझे ! अगर ज़करिया का कोइ वारिस है तो बताओ मुझे। (हंसता है) ये
सिर्फ एक मज़ाक है।
सब हंसते हुए बाहर निकल जाते हैं। ज़करिया अकेला रह जाता है। वो अकेले में रोता है
और खुदा से शिकायत करता है।
ज़करिया :- ऐ खुदा। मैंने हमेशा खामोशी अख्तियार की और उनके तानों को हमेशा खून-इ-जिगर के साथ
बर्दाश्त किया। अब मुझमें इतनी कूवत नहीं के मैं ये सब बर्दाश्त कर सकूं। खुदाया मेरे जले
हुवे दिल को सुकून अता फरमा। (कुछ सोचता है) अगर खुदा बे-मौसम अंगूर भेज सकता है
तो क्या इस बुढापे में मुझे औलाद नहीं दे सकता ? वो बेहिसाब आता करता है, बेहिसाब। फिर
ये बात मैं इतनी देर से क्यों समझा ? और तूने मेरे इस बुढापे में मुझे अपनी मरियम की जुबां
से ये बात बता कर समझाई। मैं कितना गाफिल और बद-नसीब था के इस से पहले मैंने इस
नेमत को तेरे खज़ाना-ए-रहमत से नहीं माँगा।
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जिब्राइल ;- और ज़करिया मेहराबे-नमाज़ में खड़ा हो गया और कहा 'आए मेरे रब, मुझे अपनी मौत के बाद
अपने रिश्तेदारों से डर है, लेकिन तू जिसे चाहता है, बे-हिसाब अता करता है, फिर मुझे एक
वारिस आता कर जो खानदान-ए-याकूब का जां-नशीन हो। और ऐ मेरे रब, उसे अपना मकबूल
बन्दा बना दे। तो मैंने ही उससे कहा के ' ऐ ज़करिया, हम आप को खुशखबरी देते हैं, उस बच्चे की
जिसका नाम तू यूहन्ना रखना, और खुदा ने इससे पहले उसका हमनाम भी किसी को नहीं कहा।
और तुम्हारा ये बेटा उस मसीहा की जो जल्द ही पैदा होने वाला है, तस्दीक करेगा। और
ज़करिया ने कहा 'ऐ मेरे रब, मेरे यहां लड़का कैसे होगा, जबके मेरी बीबी बाँझ है और मैं खुद
बुढापे की आखरी दहलीज पर पहुंच चुका हूँ ? इरशाद हुवा के 'नहीं, ऐसा ही होगा। तेरे रब ने
फरमाया है, के मेरे लिए ये बिलकुल आसान है, और तू पहले खुद कुछ ना था, और उसने तुझे
पैदा किया। और तेरे लिए खुशखबरी है उस बेटे की, जो अपनी कौम का बुज़ुर्ग और पेशवा होगा
जिसे खुदा बचपन ही में हिकमत अता कर देगा और जो अपनी कौम का पैगम्बर होगा।
ज़करिया ने अर्ज़ किया के ऐ परवरदिगार, मेरे लिए कोइ अलामत मुकर्रर फरमा तू। इरशाद
हुवा के तेरे लिए अलामत ये है के तुम तीन दिन तक किसी शख्स से बोल ना सकोगे।
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दृष्य ८
एक सड़क का दृश्य। कुछ लोग इधर उधर जमा हो कर यूं ही व्यर्थ समय व्यतीत कर रहे हैं।
आदमी १:- जिस प्रकार जिरजे में सर्राफ़ो और जानवर बेचने वालों की दुकानें खुलती जा रही हैं
उससे तो लगता है जैसे जल्द ही ये गिरजा किसी बाज़ार में तब्दील हो जायेगा।
आदमी २:- काश कोइ ऐसा हो जो सर्राफों के पीढ़े और कबूतर बेचने वालों की चौकियां उलट दे।
आदमी १:- अरे इतना ही नहीं ! मैं तो चाह्ता हूँ के कोई ऐसा हो जो इन सबको कोड़े लगाए, इनकी भेड़
बकरियों को भगा दे और इनके सिक्कों को बिखरा दे।
आदमी :- काश कोइ तो हो !
दूसरी तरफ :-
आदमी ३:- हेरोडियस पगलाया घूम रहा है।
आदमी ४:- क्यों ?
आदमी ३:- मसीहा की पैदाइश के ख़्वाब ने उसकी नींदे उड़ा रखी हैं।
आदमी ४:- जितना वो पगलाएगा, उतनी हम लोगों की मुसीबतें बढ़ेंगी।
तीसरी तरफ दो औरतें
औरत १:- अभी डेबरा दिखी थी रास्ते में, अपनी नई तलित पर इतरा रही थी।
औरत २:- अरे इसमें इतराने की क्या बात है। मैंने भी तो नई तलित ली है, कल पहनी भी थी। तुमने देखी
नहीं।
औरत १:- देखी थी, लेकिन उसकी तलित तुम्हारी तलित से ज़्यादा बढ़िया है।
औरत २ :- तुम्हें अच्छे बुरे की तमीज़ ही नहीं है।
औरत १ :- हाँ सारी तमीज़ सिर्फ तुम्हें ही है।
दो लोग अलग कोने में
आदमी ५:- इस बार फसल भी कुछ ठीक होने के आसार लग रहे हैं।
आदमी ६ :- लगता है हमारे भी अच्छे दिन आने वाले हैं।
आदमी ५:- हमारे अच्छे दिन तो तब आएंगे जब हमारा मसीहा पैदा होगा।
आदमी ६ :- और वो मसीहा कब पैदा होगा ?
आदमी ५:- जब आसमान में एक नया सितारा दिखाई देगा।
आदमी ६:- लेकिन वो सितारा कब दिखाई देगा ?
आदमी ५:- जब एक कुंवारी मां बनेगी।
आदमी ६:- कुंवारियां कहीं मां बन सकती है?
\आदमी ५ :- भविष्यवाणी तो यही कहती है।
आदमी ६:- भाई आप तो नजूमी हो ! सितारों की गड़ना क्या कहती है ?
आदमी ५:- वो सितारा उदय हो चुका है। लेकिन अभी हमारे आसमान पर नहीं दिख रहा।
आदमी ६ :- तो किस आसमान पर दिख रहा है ?
आदमी ५:- दूर हिन्दोस्तां, फारस और अरब के आसमान पर। जब वो सितारा चलता हुआ यहां पहुंच जायेगा
तो समझ लेना के मसीहा के आमद की घड़ी आ पहुंची है।
आदमी ६:- आओ मेरे मसीहा जल्दी आओ।
तभी एक आदमी चिल्लता हुवा आता है
आदमी :- लोगों चमत्कार हो गया है चमत्कार।
सभी उसकी तरफ देखने लगते है
आदमी १:- क्या चमत्कार हुवा है ?
आदमी :- ज़करिया की बीबी पेट से है।
आदमी २:- बौरा तो नहीं गए हो। कहीं इस उम्र में किसी की गोद भर्ती है ?
आदमी :- नहीं मैं सच कह रहा हूँ।
औरत १:- तुम्हें कैसे मालूम के वो पेट से है ?
आदमी :- दाई ने उनका मुआयना किया है, उसी ने बताया के एलीज़ाबेथ के पेट में बच्चा है।
आदमी ३:- अगर ऐसी बात है तो ये वाकई एक चमत्कार है।
आदमी ४:- ज़करिया क्या कहते हैं ?
आदमी :- ज़करिया खामोश हैं
आदमी ५:- क्यों ?
आदमी :- उन्होंने एक पाटी पर लिख कर बताया के खुदा ने ये अलामत मुकरर की है के वो तीन दिनों तक
कुछ भी बोल न सकेगा।
आदमी ६:- किस बात की अलामत ?
आदमी :- यही के इस उमर में वो बाप बनेंगे।
आदमी १:- अच्छा ?
आदमी २:-हाँ। और देखो ये खबर भी आ गई।
आदमी :- हाँ।
औरत २ :-देखा खुदा का वादा ? कैसा पूरा हो गया
औरत १ :- मैं नहीं कहती थी, के वो खुदा का नबी है ?लेकिन पादरी हमेशा उनका मज़ाक उड़ाते थे।
आदमी ३ :- इब्राहीम की तरह खुदा ने ज़करिया को बुढापे में औलाद आता की।
आदमी :- और तो और, खुदा ने उस बच्चे का नाम भी मुकरर कर दिया है, यूहन्ना।
आदमी १ :- यूहन्ना ? ये कैसा नाम हुवा ? क्यों नजूमी? आप क्या कहते हैं?
आदमी ५:- यूहन्ना का मतलब है, भरपूर ज़िन्दगी। वो शहीद होगा और हमेशा ज़िंदा जावेद रहेगा।
उसका नाम दुनिया के इतिहास में अमर रहेगा।
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जिब्राइल:- आज मसीही गिरजों में औरत और मर्द, पादरियों के साथ बराबर से दुआ करते हैं। लेकिन क्या
आप जानते हैं के यहूदी गिरजे में जिसे हैकल भी कहा जाता है, वहां औरतों के लिए पादरियों
के साथ दुआ करने की मनाही थी। पादरियों के साथ तो क्या मर्दों के साथ भी दुआ करने की
मनाही थी। गिरजे में औरतों के लिए एक अलग दलान था। औरतें बस उस दलान तक ही
सीमित रहती थीं। उसके आगे जाने की हिम्मत करने वाली औरत के लिए सज़ा-इ-मौत मुकरर
थी। लेकिन एक दिन मरियम ने ये परम्परा तोड़ दी। एक दिन मरियम को प्रेरणा हुई और वो गिरजे
के उस हिस्से में दुआ करने जा पहुंची जहां सारे पादरी दुआ कर रहे थे। बस फिर क्या था। यहूदी
पादरियों को लगा के एक औरत ने मर्दों की सत्ता को चुनौती दी है। सब अंदर तक हिल गए।
मरियम पर फैसला लेने के लिए सभा बुलाई गई। सच बात तो ये है के वो मरियम के बहाने
ज़करिया से भी अपनी दुश्मनी निकालना कहते थे।
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दृश्य १०
फरीसियों की सभा
फरीसी १ :- कोइ बात नहीं ? इतना बड़ा गुनाह हो गया और तुम कह रहे हैं के कोइ बात नहीं ! तुम तो एक
ज़माने में हमारी शरीयत के उस्ताद थे, आज कैसे कह रहे हो के कोइ बात नहीं।
फ़रीसी २ :- साफ कह दो के कौमें यहूद में सुलेमान के गिरजे को चलाने की सलाहियत नहीं है।
फरीसी ३ :- हारुन और मूसा की शरीयत को छोड़ कर सब को फारिग कर दें सब को। क्या ज़रूरत है
दुआ और कुर्बानी की और बाकी की रस्में अदा करने की
फरीसी ४ :- कल से हमे सैडून के खुदा अस्तर, मोईब के खुदा कामूश और फैशुनियो के खुदा मलूकी की
इबादत करनी होगी।
फ़रीसी १:- या फिर अब हमें हेरोदियस की मूर्ती अपनी इबादत गाह में लगा कर उसकी इबादत शुरू करनी
होगी।
फरीसी २:- हमें जल्दी से इस सैन्हेद्रिन में जकरिया और मरियम का फैसला करना होगा ताकी आइंदा कोइ
हमारी शरीयत का मज़ाक न उड़ा सके।
सब फरीसी :- हां हां ठीक है ये बिलकुल ठीक है।
जकरिया :- तुम लोग भी अच्छी तरह सुन लो, क्या तुम लोग अपने गरेबान में झाँक कर ये नहीं देख रहे हो
के मूसा और खुदा के आदेश की तुम लोग किस तरह खिलाफत कर रहे हो ? और फिर खुद को
उनकी शरीयत का महाफिज़ समझते हो ! कुर्बानी और आग जलाने के अलावा, लोगों को तुमसे
और कौन सा फायदा हासिल होता है ? क्या यहोवा ने यह नहीं फरमाया है के मैं कुर्बानी को नहीं
बल्कि रहमत और मुहब्बत को पसन्द करता हूँ ? और आग के बजाए मारिफत -ए-इलाही को
मानता हूँ। लेकिन क्यों आप लोगों दिलों में रहमत और मुहब्बत का असर भी नहीं है ? क्यों ?
खुदा कहता है के मुझे आप लोगों के मज़हबी तहवारों महफिलों से सख्त नफरत है और मैं इन
महफिलों और तहवारों को पसन्द नहीं करता। मैं आप लोगों के इस तरह आग जलाने, न्याज़ देने
और कुर्बानी देने को कबूल नहीं करता।
सब लोग सर झुकाये सुनते हैं
जकरिया :- क्या आप लोगों ने किताब-इ-मुक़द्दस में नहीं पढ़ा है, जिसमें इरशाद है के इबादत की जंजीरों
को तोड़ दो, और लोगों को गुलामी से निजात दिलाओ, मज़लूमों को आज़ाद और बेघर गरीब
लोगों को अपने घरों में पनाह दो। जो नँगे है उन्हें कपड़े पहनाओ, अपने खानों में भूखों को भी
शरीक करो, और अपने रिश्तेदारों की मदद करते फिरो। आप लोगों नें ये बातें जोशुआ नबी की
किताब में भी पढी हैं फिर ? फिर उसपर अम्ल क्यों नहीं करते हो ?
सब खामोश
फरीसी ३ :- जनाबे-इ-जकरिया ने, तौरेत की मुक़द्दस आयत याद दिला कर हमें नसीहत की है जिसके हम
उनके मशकूर हैं। और अब मैं भी इस इबादतगाह और उसमें मरियम की मौजूदगी के मुताल्लिक
उनसे कुछ सवालात करना चाहता हूँ। और मुझे उम्मीद है जवाब देंगे। क्या आप ये बात तस्लीम
करते हैं के किताब-ए-मुक़द्दस में हमेशा से बनी-ए-इस्राइल के बेटों का ज़िक्र है न की बनी-ए-
इसराइल की बेटियों का।
जकरिया :अगर आप की मुराद कौम और कबीले से है। ...
फरीसी ३:- क्या आप ये भी तस्लीम करते हैं के एक लड़की की कद्र-ओ-कीमत हमारे नज़दीक उसी मुआवजे
के बराबर है जो लड़की का बाप वसूल करता है और वो अपनी बेटी को उसके शौहर के हाथ बेच
देता है। और फिर शादी के बाद उसका शौहर उसका मालिक बन जाता है?
ज़करिया :- आप के नज़दीक तो ये ठीक है लेकिन। ...
फरीसी ३:- और आप जानते हैं के मर्द अपनी दौलत और हैसियत के हिसाब से जितनी चाहे बीबियाँ और
कनीजें रख सकता है ?
ज़करिया :- ठीक। लेकिन ये काम.........
फरीसी ३:- बेहतर जानते हैं के ख्वातीन का दाखिला पादरियों के कक्ष में न केवल वर्जित है, बल्कि इसके
लिए मौत की सज़ा भी मुकरर है ? आपको ये भी मालूम है के कुर्बानी में हिस्सा लेना, यहां तक
के उसको देखना भी औरतों के लिए जायज़ नहीं है।
जकरिया :- मैं कुर्बानी के बारे......
फरीसी ३:- अब मैं आप से पूछना चाह्ता हूँ, के क्या आप को यहूदी मजहब में औरतों के लिए मुकरर
पाबन्दियों का इल्म है की नहीं ?
ज़करिया :- (कमजोर आवाज़ में) मुझे इल्म है। जिस यहूदी मज़हब की तुम लोग पैरवी कर रहे हो ये
पैबन्दियाँ उसी की पैदावार हैं। लेकिन हकीकत ये है की हज़रत मूसा की शरीयत में औरतों
को बड़ा मकाम दिया गया है। आप खुद बेहतर जानते हैं के मर्दों की शख्सियत औरतों के द्वारा
दी गई शिक्षा पर निर्भर करती है। मर्द की पहली उस्ताद उसकी मां ही होती है। वो ही उसे उंगली
पकड़ कर पहला कदम रखना सिखाती है। पहला शब्द जो आप सबके मुँह से निकला था, वो था
'मां' और आप औरतों के बारे ऐसे ख्यालात रखते हैं? शर्म आनी चाहिये आप लोगों को और हर
उस शख्स को औरतों को अपनी मिल्कियत या गुलाम समझते हो।
फरीसी ३:- (तेज़ आवाज़ में) आपको पाबन्दियों का इल्म है के नहीं ? क्या आपने मरियम से कहा था के
वो पादरियों के साथ खड़ी हो कर दुआ में शिरकत करें ?
ज़करिया :- नहीं। मैंने उसे इजाज़त नहीं दी।
फरीसी ३:- फिर वो किसकी इजाज़त से वहां दाखिल हुई ?
जकरिया :- मुझे नहीं पता।
फरीसी ३:- मैं ज़करिया, अबिया खानदान के सर्वरा को नाहिद करार देता हूँ। ये बुड्ढा या तो पागल हो गया
है, या उस बच्ची ने इस पर जादू कर के इसे अपने काबू में कर लिया है। अब मैं आप मोमिन
और परहेज़गार पादरियों से सवाल करता हूँ के, क्या आप लोग ये कबूल करेंगे के अब से
इस इबादतगाह में, औरतें भी मर्दों के साथ दुआ में शामिल हों ?
सब :- नहीं कबूल करेंगे नहीं करेंगे।
फरीसी ३:- क्या आप लोगों को मंज़ूर है के ज़करिया और मरियम को सख्त से सख्त सज़ा दी जाए।
सब :- दोनों को जला देना चाहिये। (का शोर होने लगता है)
मुख्य फरीसी :- खामोश। आप सब खामोश रहिये। इंतेहा पसन्दी से गुरेज़ करें।
सब खामोश हो जाते हैं
मुख्य फरीसी :- मरियम ने जो किया है वो वाकई शरिया के खिलाफ है और ना-काबिल-ए-माफी है।
लेकिन हमें ये भी देखना होगा के इतने सालों में मरियम ने कभी कोइ ऐसा काम
नहीं किया जिससे शरिया की ना-फरमानी होती हो। हो सकता है उसने ये काम किसी
गफलत में कर दिया हो। इस लिए मरियम को सन्देह का लाभ देते हुए कोइ बड़ी
सज़ा नहीं दी जाती है। वैसे भी अब मरियम की घर वापस जाने की उम्र हो चुकी है।
इस लिए मरियम को इसी वक्त गिरजा छोड़ कर वापस जाने का हुक्म दिया जाता है
और ज़करिया को ताकीद की जाती है के वो मरियम की जल्दी से जल्दी शादी का इंतज़ाम
करें।
जकरिया :- जी। मरियम की शादी नासरत नगर के यूसुफ नामक दाऊद के घराने के एक युवक के साथ
तय की जा चुकी है और जल्द ही मंगनी भी कर दी जाएगी।
मुख्य फरीसी :- बेहतर होगा।
फरीसी ३:- और जकरिया के लिए सज़ा ?
मुख्य फरीसी :- ये कहीं भी साबित नहीं हुवा के मरियम ने जो किया उसमें कहीं भी ज़करिया की सहमती
थी। इसलिए ज़करिया के लिए किसी भी सज़ा की बात ही नहीं पैदा होती।
Fade Out
जिब्राइल :- और फिर मरियम हैकल से निकल कर अपने घर, गलील के नाजरथ नगर को आ गई। घर पर भी
वो पूरी तरह से खुदा की इबादत में डूबी रहती और लोगों की भलाई के कामों में लगी रहती। उसकी
मंगनी दाऊद के घराने के यूसुफ़ नामक व्यक्ति से हो चुकी थी। यूसुफ़ पेशे से एक बढ़ई था जो
के खुद भी एक खुदा परस्त व्यक्ती था और अपना पेशा भी बहुत ही ईमानदारी से करता था।
भले ही वो गरीब था लेकिन उस पर खुदा की बरकत थी।
एक दिन मरियम जब अपने बीमार रिश्तेदार से मिल कर घर लौटी तो उसने पाया के उसके घर
परपलज़ जो की रूमी सिपहसालार था, अपनी पत्नी के साथ मरियम के इंतज़ार में खड़ा
था। उसकी पत्नी की गोद में एक बच्ची भी है।
मरियम :- आप ?
परपज़ :- मैं हूँ परपज़ । रूमी सेना का सिपहसालार। ये मेरी पत्नी है सेराफीना । हमारे यहां आने का
मकसद ये है के लोगों की नज़रों से दूर आपसे मुलाक़ात करें। इसलिए रात स्याह अँधेरे में मिलने
आये हैं। हमारी तुमसे एक दरख्वास्त है। अगर तुमने हमारी बीमार बेटी को शफा दी मैं तुम्हें सोने
की दस थैलियां दूंगा। और ये दस थैलियां सिर्फ तुम्हारी होंगी। तुम ये दस थैलियां रख सकती हो
मरियम। क्या तुम समझ रही हो ?
सेराफीना :- परपज़ ! क्या आप खामोश नहीं रह सकते ? ये आपका इस मुक़द्दस औरत से बात करने का कौन
सा तरीका है ?
मरियम चल कर उसकी पत्नी तक जाती है
मरियम :- (बच्ची का सर सहलाते हुवे ) कितनी प्यारी बच्ची है। अरे ! कितना तेज़ बुखार है इसको !
सेराफीना :- ये जब से पैदा हुई है, बीमार है। रूम के हकीमों से भी इसका इलाज नहीं हो सका। अब हमारा
अपने तमाम दोस्तों और रिश्तेदारों से से दूर यहां आने का मकसद इस बच्चे की सेहतयाबी
है। इसकी बीमारी की शिद्दत में रोज़-ब-रोज़ इज़ाफ़ा हो रहा है। मैं क्या करूं? अगर ये मर गई
तो मैं भी ज़िंदा रहने के काबिल नहीं रहूंगी।
परपज़ :- सेराफीना को तुम्हारी शोहरत का इल्म हुवा था। और इसरार कर रहीं थी के अब हमारी तमाम
उम्मीदें खत्म गईं हैं। सिवाय तुम्हारे मरियम। अब क्या तुम हमारी मदद करोगी ?
मरियम :- मुझे अफसोस है, के मैं कुछ नहीं कर सकती।
सरफीना हताशा से रोने लगती है
परपज़ :- (कड़े स्वर में) सुनो लड़की। अगर मेरी बेटी को शफा दोगी तो मैंने जितना तुमसे वादा किया है,
उससे भी ज़्यादा दूंगा। अपना सब कुछ तुम्हें दे दूंगा। एक बार। सिर्फ एक बार हम पर रहम
करो। इस गैर यहूद खानदान की मदद कर दो।
मरियम :- देखिये, मैं कुछ भी नहीं कर सकती। सब कुछ खुदा की रज़ा और इरादे से है। वो जो सारी दुनिया
का रब है। हम सब की शफा उसी के हाथ में है। मैं। .... मैं इस बच्चे के लिए सिर्फ दुआ ही कर
सकती हूँ
सेराफिना :- (खुश हो कर) दुआ करेगी। दुआ करेगी।
मरियम उस बच्चे के सर पर हाथ फेरती है और दुआ करती है
मरियम :- (दुआ के बाद परपज़ से) बीबी और औलाद से तुम्हारी ये मुहब्बत, तुम्हें इस मुसीबत से निजात
दिलाएगी।
सेराफिना :- उतर रहा है। देखिये परपज़। बच्ची का बुखार कितना कम हो गया। ऐ मुक़द्दस मरियम।
तू ज़िंदाबाद रहे । रब की मेहर तुझ पर सदा बनी रहे।
परपज़ :- (थैली देते हुवे) ये रही सोने से भरी दस थैलियां, सिर्फ तुम्हारे लिए।
मरियम :- मैं दुआओं की तिज़ारत नहीं करती। ये मेरे परवरदिगार की मर्ज़ी थी के इस बच्ची को शफा मिले
तो मिल गई। इसमें मेरा क्या है। अगर वो नहीं चाह्ता तो कुछ भी ना होता। अब आप लोग जाएँ
और परमेश्वर की महिमा करें। मेरी दुआ का वक्त हो गया है।
दोनों सर झुका कर बाहर निकल जातें हैं। मरियम उन्हें जाते हुवे देखती है। फिर तस्बीह
निकालती है और आँखें बन्द कर दुआ में लीन हो जाती है। एक रूहानी संगीत उभरता है।
कमरा रूहानी रोशनी से भर जाता है। जिब्राइल का प्रवेश।
जिब्राइल :- आनन्द और जय मरियम तेरी हो जिस पर प्रभू का अनुग्रह हुवा है। प्रभू तेरे साथ है।
मरियम :- (घबरा कर) ये कैसा अभिवादन है ? कौन हैं आप ?
जिब्राइल:- डरो मत मरियम। क्यों की परमेश्वर का अनुग्रह तुम पर हुवा है। ये तुम्हारे रब का पैगाम है।
खुदा ने तुझे पाक कर दिया। और तमाम ख्वातीन में से तुम्हें एक अज़ीम मकसद लिए
मुन्तख़ब किया है। देख तू गर्भवती होगी, तेरे एक पुत्र उतपन्न होगा। तू उसका नाम येशू रखना।
वह महान होगा और परम-प्रधान का पुत्र कहलायेगा। और प्रभू परमेश्वर उसके पिता दाऊद का
सिंहासन उसको देगा। वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा। और उसके राज्य का का कभी
अंत ना होगा।
मरियम :- लेकिन मेरे यहां पुत्र क्यों कर होगा ? मैं तो किसी पुरुष को जानती ही नहीं।
जिब्राइल:- पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परम्-प्रधान की सामर्थ्य तुझ पर छाया करेगी। इसीलिये
वह पवित्र उतपन्न होने वाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलायेगा। और देख, तेरी कुटुम्बनी कुटुम्बनी
एलीज़ाबेथ के भी बुढापे में पुत्र होने वाला है, ये उसका, जो बाँझ कहलाती थी छठवां महीना है।
क्यों की जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरहित नहीं होता।
मरियम :- देख, मैं प्रभू की दासी हूँ, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो।
Fade Out
जिब्राइल :- ये थी माता मरियम के शुरुआती दिनों की दास्तान के कुछ अंश। आगे की कहानी आपने आपने
अपने सन्डे-स्कूल में सुनी होगी। कौन कौन जाता है सन्डे स्कूल ? हाथ उठाइये। हाँ। सन्डे स्कूल
ज़रूर जाया करें। वैसे आगे कहानी आप लोग कैंडल नाइट सर्विस में खेले जाने वाले नेटिविटी
नाटकों में भी देखते हैं और पवित्र बाइबल में भी पढ़ते हैं।
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